23 मई से 141 दिन तक शनिदेव चलेंगे उल्टी चाल

|

Published: 14 May 2021, 03:22 PM IST

न्याय के देवता शनिदेव आगामी 23 मई को वक्री होंगे। यानी वे उल्टी चाल चलेंगे। खास बात यह है कि वे 141 दिन तक वर्की अवस्था में रहेंगे।

भरतपुर. न्याय के देवता शनिदेव आगामी 23 मई को वक्री होंगे। यानी वे उल्टी चाल चलेंगे। खास बात यह है कि वे 141 दिन तक वर्की अवस्था में रहेंगे। इसके बाद 11 अक्टूबर को मार्गी होंगे। करीब पांच माह तक वे विभिन्न राशियों के जातकों पर अच्छा-बुरा प्रभाव डालेंगे, परंतु जिनकी कुंडली में शनि अच्छी स्थिति में है, उन्हें व्यापार व उद्योग आदि में लाभ देंगे। जिन लोगों को शनि की साढ़े साती अथवा ढैया समाप्त होने वाला है, उनके रुके काम भी पूरे होने लगेंगे। पंडितों का कहना है कि जिस किसी की भी कुंडली में शनि अशुभ स्थित में हों, वे हनुमान चालीसा पढ़ें, वृद्धजनों, रोगी की सेवा, असहाय और दिव्यांगों को अन्नदान करें, कभी अनिष्ट नहीं होगा। पं. राममोहन शर्मा व पं. मनु मुदगल ने बताया कि 23 मई को दोपहर ढाई बजे शनिदेव व्रकी होने जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में शनिदेव खुद पीडि़त हो जाते हैं और शुभ फल कम ही देते हैं। करीब पांच महीने तक उल्टी चाल चलने के बाद 11 अक्टूबर को शनि फिर से मार्गी होंगे। शनि एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक गतिशील रहते हैं। इस वजह से इस साल शनिदेव राशि परिवर्तन नहीं करेंगे। ज्योतिषियों ने बताया कि अभी शनिदेव स्वयं की मकर राशि में हैं। अपनी ही राशि में वक्री होने से साढ़े साती और ढैया वाले जातकों को अधिक परिश्रम करने पर ही अच्छे फल मिलेंगे। वर्तमान में मिथुन, तुला, धनु, मकर व कुंभ राशि वालों को सावधान रहना होगा।

राशियों के अनुसार इस प्रकार मिलेगा लाभ

मेष: दशम भाव का वक्री शनि पदोन्नति दिलाएगा।

वृषभ: भाग्य स्थान में होने से शनि रुके काम पूरे कराएंगे।

मिथुन: संतान सुख पर शारीरिक कष्ट।

कर्क: स्थानांतरण के योग।

सिंह: आर्थिक लाभ।

कन्या: संपत्ति में बढ़ोतरी।

तुला: निवेश सोच-समझ कर करें।

वृश्चिक: विवाह के योग बनेंगे।

धनु: नौकरी व व्यवसाय में परिवर्तन।

मकर: सेहत का ध्यान रखें।

कुंभ: व्यय अधिक होगा।

मीन: धन वृद्धि, यात्राएं होंगी।

घरों पर रहकर मनाई अक्षय तृतीया

इस बार अक्षय तृतीय के महामुहूर्त पर भी शहर में शादियों की गूंज नहीं सुनाई देगी। हर साल इस महामुहूर्त पर सैकड़ों की संख्या में शादियां होती हैं, लेकिन वर्तमान में चल रहे कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के कारण इस बार इस महामुहूर्त पर भी विवाह समारोहों की रौनक नहीं दिखाई देगी। पूरे साल में अक्षय तृतीया का दिन विवाह आदि मांगलिक कार्यों के लिए अबूझ माना जाता है। सालभर में सबसे अधिक विवाह इसी दिन होते हैं। अक्षय तृतीया का पर्व शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन विवाह आयोजन भी नहीं होंगे। हालांकि ब्राह्मण समाज की ओर से परशुराम जयंती घर-घर मनाई जाएगी। सामूहिक रूप से कोई कार्यक्रम नहीं किया जाएगा।