खनन के विरोध में आंदोलनकारी 5 को कलक्ट्रेट का करेंगे घेराव

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Published: 28 Feb 2021, 09:29 PM IST

ब्रज के दिव्य पर्वतों पर हो रहे खनन के विरुद्ध चल रहे धरने के 44 दिन गुजर जाने के बाद भी आंदोलन को लेकर सरकार और प्रशासन की उदासीनता व उपेक्षा के चलते रविवार को धरना स्थल पर आंदोलन से जुड़े प्रमुख संगठन व जनप्रतिनिधियों की महत्त्वपूर्ण बैठक हुई।

भरतपुर. ब्रज के दिव्य पर्वतों पर हो रहे खनन के विरुद्ध चल रहे धरने के 44 दिन गुजर जाने के बाद भी आंदोलन को लेकर सरकार और प्रशासन की उदासीनता व उपेक्षा के चलते रविवार को धरना स्थल पर आंदोलन से जुड़े प्रमुख संगठन व जनप्रतिनिधियों की महत्त्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से प्रशासन के खिलाफ व सरकार को चेताने के लिए आगामी 5 मार्च को बड़ी तादाद में भरतपुर पहुंचकर जिला कलक्टर के कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है। बैठक की अध्यक्षता कर रहे पूर्व विधायक व संरक्षण समिति के संरक्षक गोपी गुर्जर ने कहा कि अब यह स्पष्ट हो गया है कि प्रशासन पर आन्दोलन का कोई दवाब नहीं है। तभी जिस आदिबद्री पर्वत की सुरक्षा के लिए हम विगत 10 वर्षों से संघर्ष कर रहे है व पिछले 45 दिनों से स्थानीय ग्रामवासी व साधु संत धरने पर बैठे हैं। उस हमारी आस्था के केंद्र को पूर्णरूप से खत्म करने के लिए खनन विभाग व प्रशासन माफियों के हाथों बिककर नए खनन पट्टे देने में लगा हुआ है। उन्होंने बताया कि रविवार की आंदोलनकारियों की अहम बैठक में आगामी 5 मार्च को प्रशासन को आंदोलन की धमक अनुभव कराने के लिए जिला कलक्टर के घेराव कर उग्र प्रदर्शन का निर्णय लिया गया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी प्रदर्शन में कई पूर्व विधायकए पूर्व सांसदए 40 से अधिक गावों के सरपंच, स्थानीय जनप्रतिनिधि व ग्रामवासी सम्मिलित होंगें। समिति के संरक्षक राधाकांत शास्त्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि 5 मार्च को बड़े आंदोलन की एक छोटी सी झलक दिखाने के लिए प्रारम्भ में भरतपुर कलक्ट्रेट का घेराव किया जाएगा। यादव समाज के सचिव सत्यप्रकाश यादव ने बताया कि रविवार को नगर के आलमसाकुंडा में सम्पन्न यादव समाज की बैठक में यादव समाज के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मिति से ब्रज के पर्वतों के इस आंदोलन में शामिल होने की घोषणा की है।

वही दूसरी ओर कार्यवाहक एडीएम हेमंत कुमार का कहना है कि सरकार और प्रशासन की मंशा और रुख इस मामले में पूरी तरह सकारात्मक है। सरकार द्वारा पूर्व में भी इनकी मांग पर डीग और कामां में 5000 वर्ग किलोमीटर से अधिक भूमि को वन संरक्षित क्षेत्र घोषित किया जा चुका है। अब भी प्रशासन आंदोलन कर रहे साधु-संत और ग्रामीणों से लगातार बातचीत कर रहा है। आदि बद्री और कंकाचल का जो क्षेत्र आंदोलनकारी संरक्षित घोषित करना चाहते हैं। सरकार और शासन इस दिशा में गंभीर है। पर पटवारियों की हड़ताल के चलते इस समय उक्त क्षेत्र का सर्वे कराया जाना संभव नहीं है। पटवारियों की हड़ताल समाप्त होते ही क्षेत्र का सर्वे कराया करा कर सही स्थिति की जानकारी होने के पश्चात ही इस दिशा में कदम उठाना संभव हो सकेगा ।