अब काली फंगस की दस्तक, पहला मरीज मिलने के बाद इलाज को जयपुर भेजा

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Published: 15 May 2021, 04:01 PM IST

-अगर है कोई परेशानी तो तुरंत लीजिए डॉक्टर से सलाह

भरतपुर. अभी संक्रमण की रफ्तार पर काबू भी नहीं पाया जा सका था कि विशेषज्ञों ने कोविड-19 से ठीक हो रहे लोगों में कवक (फंगल) संक्रमण के खतरे को लेकर सचेत किया था। म्यूकोरमाइकोसिस नामक इस फंगल संक्रमण को सामान्य बोलचाल की भाषा में काला फंगल के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा ही एक पहला केस भरतपुर में भी सामने आया है। उसे इलाज के लिए जयपुर रैफर किया गया है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कोरोना से ठीक हो रहे या ठीक हो चुके लोगों को यह संक्रमण हो सकता है। कमजोर इम्यूनिटी वालों के लिए यह संक्रमण खतरा बना हुआ है। नाक से शुरू होने वाला यह इन्फेक्शन आंखों और मस्तिष्क तक भी पहुंच जाता है, इतना ही नहीं यह कैंसर की तरहजानलेवा भी हो सकता है।
इसी बीमारी से संबंधित एक संदिग्ध रोगी रुदावल कस्बे से शहर में कामां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत व सरकारी ईएनटी रोग विशेषज्ञ डॉ. कुलदीप सोनी के पास इलाज कराने के लिए आया था। रोगी की संपूर्ण जांच करने पर पाया गया कि मरीज उच्च मधुमेह पीडि़त है। करीब 12 दिन पहले रोगी को बुखार, जुकाम, खांसी होने पर बंशी पहाड़पुर में जांच के लिए दिखाने पर मरीज का ऑक्सीजन लेवल 90 मिला था। मरीज को कोरोना का संदिग्ध रोगी मानकर कस्बे में ही उपचार शुरू किया गया था। बाद में करीब पांच दिन बाद मरीज को सीधी आंख में दर्द, गाल पर सूजन, बुखार बढऩे पर स्टेरॉइड शुरू कर दिए गए थे। करीब चार दिन तक आराम नहीं मिलने तथा आंख के बाहर आने पर मरीज को भरतपुर रैफर किया गया। डॉ. कुलदीप सोनी काफी जांच पड़ताल के बाद मरीज को जयपुर रैफर किया।

क्या है म्यूकोरमाइकोसिस

म्यूकोरमाइकोसिस एक म्यूकर माइकोसिटीज ग्रुप की फफूंद है जो विरल परन्तु गंभीर संक्रमण पैदा करती है। फफूंद सामान्यत: वातावरण में होती है परन्तु ऐसे रोगी जो अनियंत्रित डायबिटीज, रक्त कैंसर, थैलेसीमिया या अन्य कोई कैंसर से ग्रसित हैं अथवा उन्होंने लंबे समय से अधिक मात्रा में स्टेरॉइड का सेवन कर किया है उनमें यह फफूंद घातक संक्रमण करती है तथा लगभग 50 फीसदी मामलों में जानलेवा भी हो सकती है। ऐसे रोगियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है जो कि फफूंद के संक्रमण को बढ़ावा देती है।

सबसे पहले यह कर सकते हैं

लक्षणों के आधार पर मरीज का सीटी स्कैन, एमआरआई तथा फंगल कल्चर कराया जाता है। बीमारी के फैलाव के आधार पर ऑपरेशन कर समस्त फंफूद तथा मृत ऊतक को निकाला जाता है तथा आवश्यकता पडऩे पर पूरी आंख तथा जबड़े को निकाल निकाल दिया जाता है। बाद में लंबे समय तक एंटी फंगल दवाइयां चलती हैं। साथ ही काम प्रतिरोधक क्षमता की वजह यथा अनियंत्रित डायबिटीज को सख्त नियंत्रण किया जाता है। अगर स्टेरॉइड का उपयोग जरूरी है तो चिकित्सक के परामर्श से जरूरी मात्रा में नियत समय तक लेना चाहिए। ऐसे सभी रोगी जिनमें कम रोग प्रतिरोधक क्षमता की संभावना है, उनको कोरोना के इलाज के लिए अपनी मर्जी या झोलाछापों के कहने पर स्टेरॉइड का सेवन नहीं करना चाहिए तथा आवश्यक होने पर चिकित्सकीय सलाह से ही स्टेरॉइड लेने चाहिए। पूर्व में बताए लक्षण होने पर तुरंत नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए ताकि समय रहते इलाज लिया जा सके तथा मरीज की जान को बचाया जा सके।

इनका कहना है

-संक्रमित लोगों को आंखों में लाली और दर्द की समस्या होती है। इसके अलावा कुछ लोगों को डबल विजन और गंभीर मामलों में अंधापन होने का भी खतरा रहता है। यह संक्रमण आंख की नसों को प्रभावित कर देता है, जिसके कारण आंखों में अन्य कई तरह की दिक्कतें भी हो सकती हैं।

डॉ. कुलदीप सोनी, ईएनटी रोग विशेषज्ञ एमबीबीएस एमएस