एक्शन प्लान: 40 फीट की होगी सीएफसीडी कवर ड्रेन, दोनों ओर 20-20 फीट की बनेगी सड़क

|

Published: 26 Feb 2021, 12:16 PM IST

-बाकी जगह के हिसाब से दोनों ओर विकसित होंगे पार्क व फुलवाड़ी, जहां व्यावसायिक स्थान वहां दुकान भी बनाएंगे
-15 मार्च तक निविदा निकालने व 15 मई कार्य आदेश निकालने की बनाई योजना

भरतपुर. राज्य सरकार की ओर से शहरी ड्रेनेज सिस्टम के लिए 200 करोड़ रुपए की बजट में घोषणा के साथ ही नगर निगम ने एक्शन प्लान बनाकर काम शुरू कर दिया है। निगम ने सिटी फ्लड कंट्रोल ड्रेन (सीएफसीडी) को लेकर तारीख के हिसाब से भी कार्य प्रस्तावित किया है। अतिक्रमणों को लेकर भी एक्सपर्ट से बात की गई है। ताकि काम शुरू होने के बाद अगर कोई परेशानी आए तो प्रशासनिक स्तर पर गठित टीम की ओर से सख्ती से निपटा जा सके। अगर सबकुछ प्रस्तावित योजना के अनुसार हुआ तो संभवतया 15 मार्च तक सीएफसीडी निर्माण की निविदा जारी कर दी जाएगी। इसके बाद 15 मई तक कार्य आदेश जारी किया जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि राजस्थान पत्रिका ने सिटी फ्लड कंट्रोल ड्रेन (सीएफसीडी) का मुद्दा वर्ष 2005 से ही लगातार उठाया था। 12 फरवरी 2021 को राजस्थान पत्रिका के संवाद सेतु में भी यह मुद्दा पुरजोर ढंग से उठाया गया था। 19 अगस्त 2011 को राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित मर गया रामगढ़ बंधा समाचार पर हाइकोर्ट ने स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लेकर उसे याचिका मानते हुए सुनवाई की। इसमें राज्य सरकार से जवाब मांगा। पत्रिका के मुद्दे के कारण ही अब तक के विधायकों ने इसे विधानसभा में उठाया। अब जाकर इस बड़ी समस्या से राहत मिलने की उम्मीद बंधी है। भरतपुर शहर के जल निकासी तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए मास्टर ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 200 करोड़ रुपए व्यय किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार वर्ष 1985 में बाढ़ आई थी। बाढ़ के पानी को निकालने के लिए शहर के चारों ओर बनी खाई के भीतरी भाग में बाढ़ के पानी को गिर्राज कैनाल में बहाकर निकालने के लिए ड्रेन बनाई गई। इसे सीएफसीडी के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा हीरादास पोखर, कच्चा कुंडा, ब्रह्मचारी बगीची, अटलबंद, अलक-झलक की बगीची, रामकोट, डिग्गी गुलजार बाग, मस्तराम कॉलेज की डिग्गी आदि जलाशय हैं जिन्हें उच्च न्यायालय ने चिह्नित किया है। बताते हैं कि अटलबंद पहले एक बांध था जो आज अतिक्रमणों का शिकार होकर समाप्त हो चुका है। सीएफसीडी का निर्माण कराने के लिए भले ही निगम की ओर से योजना बनाई जा चुकी है, लेकिन अतिक्रमणों के कारण परेशानी आना भी तय है। ऐसे में अतिक्रमणों से निपटने के लिए कारगर योजना बनाना आवश्यक होगा।

जहां जितनी जगह, योजना के अनुसार करेंगे उपयोग

सबसे पहले सीएफसीडी, उसके बाद रंजीतनगर फ्लड कंट्रोल ड्रेन, दो मोरा, हीरादास कुंडा से लेकर हाईवे तक जाने वाली ड्रेन, गिर्राज कैनाल में जाकर सारी मिलेंगी, उन सभी पर काम होगा। यह 19 किलोमीटर का पूरा एरिया है। सीएफसीडी कवर ड्रेन प्रस्तावित है। उसके ऊपर रोड बन जाएगा। सफाई के लिए ट्रेक्टर-ट्रक घुस सकेंगे। ऊंचाई 10 फीट व चौड़ाई 40 फीट की होगी। साइड में दोनों ओर 20-20 फीट की सड़क बनाई जाएगी। इसके बाद जो जगह बच रही है वहां प्लान के अनुसार फुलवाड़ी, पार्क आदि विकसित किए जाएंगे। जहां सर्वे कर लिया गया है। अगर व्यावसायिक रूप से जगह है तो वहां दुकान आदि का निर्माण किया जा सकेगा। 15 मार्च तक निविदा निकाल दी जाएगी। 15 मई तक कार्य आदेश जारी करने की योजना है। कार्य बीओटी आधार पर ही होगा। 10 साल के लिए देखरेख कार्यकारी एजेंसी को ही करनी होगी। उसके बाद नगर निगम को सुपुर्द कर दिया जाएगा। अगर कोई परेशानी आती है तो ठेका कंपनी की जिम्मेदारी रहेगी। उस संवेदक को ही सारा काम करना होगा। इस पर न्यूनतम 200 करोड़ रुपए का खर्च आएगा।

अब सड़कों पर नहीं रुकेगा पानी, ऐसी बनेंगी सड़क

नगर निगम पिछले दिनों हुए सर्वे के आधार पर एक और योजना बनाई है। इसमें सर्वे के आधार पर पता चला है कि बाहरी कॉलोनियों में सड़कों को बगैर लेवल के बनाया गया। इससे वहां जलभराव की समस्या बनी रहती है। अब ऐसी कॉलोनियों को सेक्टर प्लान में बांटकर कार्य कराया जाएगा। पहले चरण में एक से सात, आठ से 17, 52 से 58 में पैकेज लगाया जाएगा। बृजनगर आदि भी इसमें शामिल है। उसमें लेबल के हिसाब से रोड बनेगी। डीपीआर समुद्रतल से निचाई कहां कितनी है, उसी आधार पर बनी है। इलेक्ट्रिक पोल के साथ स्ट्रीट लाइट भी लगाई जाएंगी।

अफसर करते रहे कमाई, अब भुगत रहे हम

17 मई 2018 को भरतपुर में तत्कालीन जिला कलक्टर संदेश नायक एवं यूआईटी सचिव लक्ष्मीकांत बालोत को खाई की स्थिति सन् 1947 के हिसाब से चौड़ाई रखने के आवंटनों को निरस्त अतिक्रमणों को हटाने के निर्देश दिए। तत्कालीन जिला कलक्टर ने इस सब के लिए चार सप्ताह का समय मांगा। उस समय जिला प्रशासन ने सीएफसीडी से 500 से अधिक अतिक्रमण चिह्नित किए और कुछ अतिक्रमण हटाए भी थे। लेकिन, खाई के शेष भाग से न तो अतिक्रमण चिह्नित किए और न उन्हें हटाने की कार्रवाई की गई। अब इस खाई की स्थिति बदतर हो गई है। वहीं अतिक्रमण की स्थिति ये है कि खाई समाप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी है। उच्च न्यायालय ने खाई की स्थिति 1947 के हिसाब से सुपर इम्पोज मेप में खसरा नम्बर सहित प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, लेकिन मेप पेश नहीं किया गया। सीएफसीडी के प्रकरण में सबसे बड़ा सच यह भी निकल कर सामने आया है कि इस पूरे मामले में अतिक्रमण करने वाले लोगों के साथ ही अफसर भी बड़े दोषी है। जाने कितने ही अतिक्रमण ऐसे हैं, जिनमें यूआईटी, नगर निगम व प्रशासनिक अफसरों ने ही 2011 से लेकर अब तक मूकदर्शक बनकर अतिक्रमणकारियों की मदद की है।


जानिए सीएफसीडी के मुद्दे पर कौन क्या बोला

हमारा एक्शन प्लान तैयार

-हमारी तैयारी चल रही है। 15 मार्च तक निविदा निकालने का प्रस्ताव है। जल्द एक टीम निरीक्षण भी करेगी। 15 मई तक कार्य आदेश निकालने का प्लान बनाया गया है। बाकी नगर निगम की पूरी टीम ताकत के साथ कार्य करने में जुटी हुई है। हमारा प्रयास शहर के जलभराव की समस्या को समाप्त कर राहत प्रदान करना है। कांग्रेस का बोर्ड व सरकार एकजुट होकर इस दिशा में काम कर रहे हैं।

अभिजीत कुमार
मेयर नगर निगम


1955 की स्थिति की जाए बहाल

हाइकोर्ट ने आदेश दिया हुआ है कि 1955 की स्थिति बहाल की जाए। उस स्थिति को लाने के लिए अतिक्रमण हटाने होंगे। 500 में से 60-70 ही हटे हैं। जो कि सीएफसीडी के एरिया में ही है। खाई की बात करें तो हजारों अतिक्रमण है। अतिक्रमण हटाए बिना प्रोजेक्ट अधूरा ही रहेगा। इस स्थिति में प्रोजेक्ट डालेंगे तो हाइकोर्ट के आदेश के विपरीत रहेगा। पहले ग्राउंड वर्क किया जाना चाहिए। मार्च माह में इस पर सुनवाई भी होनी है।

श्रीनाथ शर्मा
रिटदायरकर्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता

नगर निगम एकजुट होकर कराएगी काम

राज्य सरकार ने लंबे समय से चली आ रही ड्रेनेज सिस्टम की समस्या पर ध्यान देकर ऐतिहासिक बजट में भरतपुर शहर की समस्या पर ध्यान दिया है। नगर निगम का प्रयास रहेगा कि समय पर स्वीकृत राशि से काम कराया जा सके। ताकि आमजन को राहत प्रदान की जा सके।

गिरीश चौधरी
उप महापौर नगर निगम


-पत्रिका के बहुत अच्छा अभियान चलाया। अब सरकार ने भी सीएफसीडी के लिए राशि स्वीकृत कर दी है। अब नगर निगम का भी प्रयास रहेगा कि समय पर अच्छा काम कर ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर किया जा सके।

संजय शुक्ला, निवर्तमान ब्लॉक शहर अध्यक्ष


-सीएफसीडी का मुद्दा पिछले लंबे समय से चल रहा था। राजस्थान पत्रिका ने भी अभियान चलाकर सरकार के सामने समय-समय पर मुद्दा उठाया। अब जरूरी यह है कि समय पर इसका काम पूरा होना चाहिए।

इंद्रजीत भारद्वाज, पूर्व नेता प्रतिपक्ष नगर निगम

-यह शहर की जनता के लिए बड़ी बात है कि राज्य सरकार ने लंबे समय से चली आ रही मांग पर ध्यान दिया है। 200 करोड़ सीएफसीडी के लिए स्वीकृत होना बड़ी बात है।

श्रीराम चंदेला, समाजसेवी


-सिटी फ्लड कंट्रोल ड्रेन व शहर के ड्रेनेज सिस्टम के लिए स्वीकृत राशि सही तरह से उपयोग होना चाहिए। सरकार ने राशि स्वीकृत कर बहुत बड़ा कदम उठाया है। कांग्रेस सरकार ने ऐतिहासिक कार्य किया है।

संजय लवानिया, कांग्रेस नेता

-बजट में उद्योग को लेकर भरतपुर में कुछ नहीं मिला है। सीएफसीडी के लिए राशि स्वीकृत हुई है, लेकिन पारदर्शिता के साथ समय पर काम कराए जाए, तब जाकर ही आमजन को राहत मिल सकती है।

अनुराग गर्ग, संभागीय अध्यक्ष फोर्टी

-कांग्रेस सरकार ने बजट में भरतपुर को हर क्षेत्र में कुछ न कुछ दिया है। शहरी सरकार की ओर से सीएफसीडी का निर्माण समय पर कराया जाएगा। क्योंकि कांग्रेस सरकार का यह ऐतिहासिक कदम रहा है।

दुष्यंत चौधरी, युवा नेता


-कांग्रेस सरकार ने ऐतिहासिक बजट दिया है। इसमें भी सीएफसीडी को बजट देना कम बात नहीं है। इससे शहर की कॉलोनियों में जलभराव की समस्या का भी समाधान हो सकेगा।

योगेश उपमन, कांग्रेस नेता

-बजट में शहरी समस्या पर ध्यान दिया गया है, लेकिन बेरोजगार युवाओं के लिए भी अभी और घोषणाओं की आवश्यकता है। निशुल्क कोचिंग की योजना को भी मूर्त रूप दिया जाना चाहिए।

उपासना सिंह, अध्यक्ष छात्रासंघ आरडी गल्र्स कॉलेज भरतपुर

-कांग्रेस ने बजट में ऐतिहासिक घोषणाएं की है। अब जरूरी है कि इन सभी घोषणाओं को समय पर पूरा करने के साथ ही संबंधित प्रोजेक्टों को पारदर्शिता के पूरा कराया जाए।

मनोज सिंह अवार, कांग्रेस कार्यकर्ता