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पारधी कांड में पूर्व विधायक और पूर्व जिपं उपाध्यक्ष पर केस दर्ज

By Ghanshyam Rathore

Sep, 12 2018 08:32:32 (IST)

बयान और प्रतिपरीक्षण के आधार पर उक्त साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए सीबीआई कोर्ट ने उपरोक्त अतिरिक्त आरोपियों को प्रथम दृष्टया आरोपी माना है।

CBI judge Jabalpur judge Maya Vishwals ruled today

बैतूल। सीबीआई द्वारा पारधी कांड में बोन्द्रू दंपत्ति की हत्या के मामले में दर्ज प्रकरण में बुधवार को सीबीआई सत्र न्यायालय जबलपुर ने पूर्व के आरोपियों के अतिरिक्त पूर्व विधायक सुखदेव पांसे, भाजपा नेता राजा पंवार, कचरू सरपंच, सरपंच सुरेश, डॉक्टर विजय, संदीप साबले, उमेश डांगे एवं तत्कालीन एसडीओपी डीएस साकल्ले के विरुद्ध प्रथम दृष्टया हत्या में शामिल होने का आरोपी मानकर समस्त आरोपियों को सम्मन द्वारा आहूत किए जाने का आदेश जारी किया गया है। प्रकरण में अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।
उपरोक्त प्रकरण को लेकर श्रमिक आदिवासी संगठन के अनुराग मोदी ने बताया कि पीडि़त पारधी समूह की तरफ से फरियादी अलसिया पारधी ने पूर्व में सीबीआई न्यायालय के समक्ष आरोप लगाया था कि सीबीआई ने जानबूझ कर प्रभावशाली आरोपियों को बचाने के लिए घटना के चक्षुदर्शी पारधी सदस्यों के बयान डायरी में दर्ज करने के बावजूद भी उनके बयान कोर्ट में पेश नहीं किए थे। अलसिया पारधी के उक्त आवेदन को स्वीकार करते हुए सीबीआई कोर्ट ने डायरी में दर्ज गवाहों को कोर्ट साक्षी के बतौर गवाही देने बुलाया। कोर्ट में बयान और प्रतिपरीक्षण के दौरान पारधी चक्षुदर्शी गवाहों ने उपरोक्त अतिरिक्त आरापियों के विरूद्ध बोन्द्रू दंपत्ति की हत्या व बलात्कार की घटना स्वत: कारित करने, दुष्प्रेरित करने व साक्ष्य प्रभावित करने के आरोप लगाए। तत्पश्चात एक बार पुन: अलसिया पारधी ने सीबीआई कोर्ट के समक्ष उपरोक्त आरोपियों को भी प्रकरण में आरोपी बनाए जाने का आवेदन किया। मामले में बयान और प्रतिपरीक्षण के आधार पर उक्त साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए सीबीआई कोर्ट ने उपरोक्त अतिरिक्त आरोपियों को प्रथम दृष्टया आरोपी माना है।

दस सालों से बैतूल में रह रहे पारधी
चौथिया कांड के बाद पारधी बैतूल आ गए थे। विगत दस सालों से पारधी समुदाय उत्कृष्ट स्कूल मैदान में डेरा डाले हुए हैं। हालांकि जिला प्रशासन ने पारधीयों के एक गुट को पुन: चौथिया में बसा दिया है लेकिन अलस्या पारधी गुट आज भी बैतूल में निवासरत है। पूर्व में जिला प्रशासन द्वारा सोनाघाटी में इन्हें बसाए जाने के लिए प्रयास किए गए थे लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण मामला अधर में लटक गया।