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धर्मस्थल के बाहुबली का चौथा महामस्तकाभिषेक फरवरी 2019 में

By Shankar Sharma

Sep, 12 2018 10:37:16 (IST)

धर्मस्थल स्थित बाहुबली प्रतिमा का चौथा महामस्तकाभिषेक अगले वर्ष फरवरी-2019 में होगा।

बेंगलूरु. धर्मस्थल स्थित बाहुबली प्रतिमा का चौथा महामस्तकाभिषेक अगले वर्ष फरवरी-2019 में होगा। वर्ष-1982 में महामस्तकाभिषेक के साथ स्थापित 210 टन वजनी और 39 फीट ऊंची एकल शिला से निर्मित इस प्रतिमा का वर्ष-1995 तथा वर्ष-2007 में महामस्तकाभिषेक हुआ था। वर्ष-2019 में प्रतिमा का यह चौथा महामस्तकाभिषेक होगा।

धर्मस्थल के प्रमुख डॉ वीरेन्द्र हेगड़े के अनुसार आचार्य वर्धमानसागर तथा श्रवणबेलगोला के चारुकीर्ति भट्टारक के नेतृत्व में आठ दिवसीय महामहोत्सव होगा जिसमें देश के विभिन्न राज्यों के हजारों श्रद्धालु भाग लेंगे। महामहोत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए डी.सुरेंद्र हेगड़े के नेतृत्व में महामस्तकाभिषेक समिति का गठन किया गया है। महोत्सव के लिए राज्य के सभी भट्टारकों को आमंत्रित किया जाएगा।

वार्षिकोत्सव में गूंजे आईमाता के जयकारे
बेंगलूरु. सीरवी समाज कर्नाटक ट्रस्ट एच.एस.आर लेआउट का 22वां वार्षिक सम्मेलन मंगलवार को होसूर रोड स्थित समाज के निर्माणाधीन भवन प्रांगण में हर्षोल्लास से मनाया गया।


आईमाता की पूजा, अर्चना व महाआरती की गई। इसके बाद वडेर से समाज की आराध्य आईमाता की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा सीरवी समाज भवन से प्रारंभ होकर एच.एस.आर ले आउट होते हुए मंदिर परिसर के पास निर्माणाधीन भवन में पहुंचकर धर्मसभा में परिवर्तित हुई। शोभायात्रा में आईमाता की मनमोहक झांकी सजाई गई। राजस्थान का पारंपरिक गैर नृत्य विशेष आकर्षण का केन्द्र रही।


मुख्य अतिथि बोमनहल्ली के विधायक सतीश रेड्डी थे। उन्होंने प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए क्षेत्र में मैदान उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया। कोषाध्यक्ष ताराराम चोयल ने आय-व्यय का ब्यौरा दिया। सचिव लक्ष्मणराम आगलेचा ने समाज की वार्षिक गतिविधियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की।

पालना का भव्य स्वागत
बेंगलूरु. दक्षिण नाकोड़ा संकटमोचन पाश्र्व भैरवधाम, अरसीकेरे के पालना का बुल टेम्पल रोड स्थित पारसनाथ एनक्लेव अपार्टमेंट में भव्य स्वागत किया गया।

नवीनवेली दुल्हन की भांति सजे मंडप में बड़ी संख्या में लोगों ने नाचते, गाते, खुशियां मनाते जयकारे लगाए। शाम को प्रभुभक्ति में विविध भक्ति मंडलों द्वारा भक्ति गीतों ने उपस्थित भक्तों को नाचने पर मजबूर किया। दक्षिण नाकोड़ा तीर्थ पर निर्माणाधीन जिनालय की योजना के तहत बड़ी संख्या में भक्त अपनी इच्छानुसार ईंट योजना कूपन लेकर निर्माण कार्य में भागी बने। देर रात तक भक्ति की गंगा बही।