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मुख्यमंत्री ने किया फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन

By Shankar Sharma

Sep, 12 2018 05:29:04 (IST)

विश्व फोटाग्राफी दिवस के अवसर पर कर्नाटक कला मंदिर स्थित सुचित्रा कला दीर्घा परिसर में मंगलवार को आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।

मैसूरु. विश्व फोटाग्राफी दिवस के अवसर पर कर्नाटक कला मंदिर स्थित सुचित्रा कला दीर्घा परिसर में मंगलवार को आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कैमरे का बटन दबाकर विधिवत प्रदर्शनी की शुरुआत की। कार्यक्रम का आयोजन शहर के फोटो पत्रकारों ने किया। कुमारस्वामी ने प्रगति गोपालकृष्ण को टीएस सत्यन स्मृति पुरस्कार से नवाजा।


इस अवसर पर कुमारस्वामी ने कहा कि फोटोग्राफी एक विशेष कला है, जहां भावनात्मक क्षणों को कैमरे में कैद किया जाता है। शहर के फोटोग्राफरों ने अपनी विशेष तस्वीरों की प्रदर्शनी लगाई है। कुमारस्वामी ने कहा कि फोटोग्राफी एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। एक मामूली तस्वीर हजारों शब्दों की तुलना में ज्यादा कारगर साबित हो सकती है। फोटोग्राफरों व पत्रकारों के लिए कई योजनाएं हैं। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ फोटोग्राफर व पत्रकारों की सहायता करने के लिए सरकार कारगर कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि मैसूरु के कई लोगों ने इस क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार जीते हैंं।


समारोह में उच्च शिक्षा और जिला प्रभारी मंत्री जीटी देवेगौड़ा, पर्यटन मंत्री सा. रा. महेश, उद्योगपति पीवी गिरी, उपायुक्त अभिराम जी शंकर, वरिष्ठ पत्रकार के शिवकुमार और अन्य मौजूद थे।

सुखी जीवन जीने के बताए गुर
चामराजनगर. राजस्थान जैन संघ के तत्वावधान में पर्युषण साधना में स्वाध्यायी सिद्धि बोहरा ने कहा कि हम दूसरों के नजरिए को समझकर निर्णायक न होते हुए जब परिवार और समाज को साथ लेकर चलते हैं तब हम सभी की भावनाओं को आदर देकर उन्हें खुश रखकर खुद भी खुश हो सकते हैं।


स्वाध्यायी अंजना बोहरा ने सुखी जीवन जीने के टिप्स और मनुष्यत्व को पालन करने के तरीके बताए। उन्होंने कहा कि एकरूपता, दया भाव रखना, नकारात्मक विचार और इमोशंस से बचना, जिससे जीवन में बहुत सुख और शांति की प्राप्ति होती है। स्वाध्यायी रूपा विनायकिया नेरात्रि भोज का त्याग और उसके सदुपयोग के बारे में जानकारी दी। स्वाध्यायी वीणा पुनमिया ने अंतगड़ सूत्र का वाचन किया। स्वाध्यायी लक्ष्मी वेदमुथा ने गीतिका प्रस्तुत की।