हर आंख हुई नम- पंचायत ने किया मना लेकिन पीछे नहीं हटीं बेटियां, बेटा बन दी मां को अंतिम विदाई

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Published: 20 Aug 2020, 08:28 PM IST

चार बेटियों ने मां के निधन के बाद उनके शव को कांधा भी दिया और फिर उनकी चिता को मुखाग्नि भी दी...

बालाघाट. हमारे समाज में आज भी कई स्थानों पर बेटियों को बेटों के बराबर नहीं समझा जाता है। ऐसा ही एक मामला बीते दिनों बालाघाट के भंडामुर्री गांव में सामने आया। जहां बेटियों ने समाज की उस परंपरा को तोड़ते हुए मिसाल पेश की जिसमें बेटियों को अंतिम संस्कार करने से रोका जाता है। मां के निधन के बाद चार बेटियों ने लोगों के मना करने के बाद भी मां को मुखाग्नि दी।

बेटियां बोलीं- 'हम हैं तो कोई और क्यों करेगा अंतिम संस्कार'
बालाघाट के भंडामुर्री गांव की रहने वाली प्रमिला नाम की बुजुर्ग महिला की लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। प्रमिला के पति की पहले ही मौत हो चुकी थी और उनका कोई बेटा भी नहीं था। चार बेटियां हैं जो मां के निधन की खबर मिलते ही अपने अपने ससुराल से मायके आ गई थीं। बेटा न होने के कारण ग्रामीण इस बात को लेकर चिंतित थे कि आखिरकार प्रमिला का अंतिम संस्कार कौन करेगा। जब इस बारे में प्रमिला की चारों बेटियों कृष्णा, लक्ष्मी, मंजुलता और दुर्गेश्वरी को पता चला तो उन्होंने खुद ही मां का अंतिम संस्कार करने की बात कही। ग्रामीणों ने उन्हें मना किया और कहा कि बेटियां अंतिम संस्कार नहीं करती हैं लेकिन बेटियां नहीं मानीं। बेटियों के न मानने पर गांव में पंचायत बुलाई गई। पंचायत में भी बेटियों की जगह किसी दूसरे रिश्तेदार को बुलाकर अंतिम संस्कार कराने की बात पंचायत ने कही। तब बेटियों ने कहा कि जब वो हैं तो कोई दूसरा उनकी मां का अंतिम संस्कार क्यों करेगा। बेटियों के न मानने पर पंचायत ने बेटियों की बात मानते हुए उन्हें अंतिम संस्कार करने की अनुमति दे दी। इसके बाद बेटियों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर पहले तो मां की अर्थी सजाई और फिर पूरे कर्मकांड के साथ मां को मुखाग्नि भी दी। गांव में पहली बार बेटियों को मां को मुखाग्नि देते हुए जिस किसी ने भी देखा उसकी आंखें नम हो गईं।