श्रम कानूनों में बदलाव व एफडीआई का विरोध

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Updated: 24 May 2020, 07:51 PM IST

खनिज मदूर एकता यूनियन ने पीएम के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

वारासिवनी। खनिज मजदूर एकता यूनियन बालाघाट सीटू यूनियन से संबंध के तत्वाधान में प्रधानमंत्री के नाम का ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व संदीप सिंह को सौंपा गया। ज्ञापन में सार्वजनिक उद्योगों का निजी करण श्रम कानूनों में बदलाव और एफडीआई के तहत मजदूरों के शोषण वाली नीति का विरोध जताया गया। यूनियन पदाधिकारियों ने बताया कि केंद्र की सरकार देश में बुनियादी ढांचा और देश के पूंजीपतियों को खुली छूट देने के उद्देश्य से लगातार श्रम कानून पब्लिक सेक्टर और एफ डीआई के तरफ भारी परिवर्तन लाकर देश की मेहनतकश जनता पर हमले कर रही है। जिससे देश की अधिकांश आबादी पर गुलामी का खतरा मंडराने लगा है जो लोकतंत्र के लिए खतरा है। श्रमिकों के काम करने की अवधि अनेक राज्यों में ८ घंटे से १२ घंटे करना श्रमिकों को गुलामी की प्रथा की ओर ले जाना इसका जीता जागता उदाहरण है।
खनिज मजदूर के पदाधिकारियों ने ज्ञापन में बताया कि देश में करोड़ों लोगों ने आपको अपना भरोसा आपके वादों अच्छे दिन आएंगे पर दिया है और आपको देश का मुखिया बनाया है। लेकिन आपके द्वारा देश में ९५ प्रतिशत आबादी के भविष्य की अनदेखी कर उनके विरुद्ध निर्णय लिया जा रहा है जो कि लोकशाही और लोकतंत्र की आत्मा पर हमला है। इसलिए यूनियन की मांग है कि देश में डॉक्टर भीमराव अंाबेडकर के द्वारा बनाई गई नीति कानून व्यवस्था में परिवर्तन ना किया जाए।
देश के पब्लिक सेक्टर को मजबूती प्रदान करें। बेरोजगार नौजवानों की उपयोग हेतु लाभप्रद नीतियां बनाएं। श्रम कानून और फैक्ट्री कानून में परिवर्तन करना बंद करें। सभी राज्यों के द्वारा तीन चार वर्षों के लिए श्रम कानून को निलंबित रखने का आदेश दिया गया है उसे वापस लिया जायें। ८ घंटे से बढ़ाकर जो १२ घंटे कार्य दिवस का जो आदेश दिया गया है उसे वापस लिया जाए।
फंसे हुए श्रमिकों को अपने अपने घर तक सुरक्षित पहुंचने के लिए राहत दिलवाई जाए और फ ंसे हुए श्रमिकों के लिए भोजन राशन की व्यवस्था करें। सभी मजदूरों को लाक डाउन की अवधि तक की मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करें। साथ ही असंगठित पंजीकृत अपंजीकृत मजदूरों को नकद हस्तांतरण करें। केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर तथा पेंशनरों और महंगाई भत्ते में रोक वापस ली ंजाये।स्वीकृत पदों को समाप्त करने का फैसला वापस लिया जाये। सभी क्षेत्रों में कार्यरत मजदूरों को स्थाई किया जाये एफ डीआई का निर्णय वापस लिया जाने की मांग खनिज मजदूर एकता यूनियन के द्वारा की गई है जिसमें तत्काल निराकरण करने की यूनियन ने की है।