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Good news : इन परिवारों ने बेटी को माना घर का चिराग, एक संतान पर ही कराई नसबंदी

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21 Feb 2020, 11:23 PM IST

फागी उपखंड : दो बच्चों के बाद नसबंदी का आंकड़ा 73 फीसदी पहुंचा

फागी. बढ़ती महंगाई से परिवार के भरण-पोषण में आने वाली समस्या के साथ अधिक बच्चे पैदा करने पर मां के स्वास्थ्य पर पडऩे वाले विपरीत प्रभाव के मद्देनजर उपखंड क्षेत्र के दंपतियों ने परिवार नियोजन के प्रति जागरुकता दिखाना शुरू कर दी है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो सुखद परिणाम सामने आ रहे हैं। 2018-2019में 904 महिलाओं ने नसबंदी कराई। 6 महिलाओं ने बेटी को ही घर का चिराग मानकर एक संतान के बाद नसबंदी करवा ली। 51 महिलाओं ने एक लड़का पैदा होने के बाद नसबंदी कराई। 602 महिलाओं ने दो बच्चे पैदा होने पर ऑपरेशन करवाया। इसी का परिणाम रहा कि एक या दो बच्चे होने के बाद नसबंदी कराने वालों का आंकड़ा 73 प्रतिशत पहुंच गया।


लिंगानुपात का आंकड़ा बराबरी की ओर

लड़के की चाहत में उपखंड क्षेत्र का वर्ष 2018 में लिंगानुपात1000 लड़के तथा 862 लड़कियां थी। 2019 में यह आंकड़ा एक हजार लड़कों के अनुपात में 960 लड़कियों तक पहुंच गया है।


नजीर... इनके लिए बेटी ही बेटा

आशा देवी गुर्जर कुड़ली, करमा देवी डालनिया, शायदबानो निवासी माधोराजपुरा, लाली देवी निवासी नारेड़ा, विमला देवी जाट निवासी कापडीवास चौरू तथा मनराज देवी जाट निवासी कुड़ली ने एक बालिका पैदा होने के बाद ही नसबंदी करवा ली। एक ही संतान बेटी होने पर नसबंदी कराने वाली महिलाओं से पत्रिका ने बात की तो अधिकतर महिलाओं ने कहा कि बेटा-बेटी में कोई भेद नहीं होता। उनका कहना था कि जो बेटा बड़ा होकर माता-पिता की सेवा करता है, तो बेटी भी कर सकती है। एक-दो महिलाओं ने शारीरिक कमजोरी होने के कारण ऑपरेशन कराने की बात कही।


परवरिश में दिक्कतें


इसी प्रकार दो बेटियां पैदा होने के बाद नसबंदी कराने वाली छोटा देवी निवासी टीकेल नरूकान व प्रेम कंवर निवासी मानपुर गेट ने बताया कि दो बेटियों के बाद पुत्र की चाहत में और संतानें बढ़ जाती। ऐसे में बच्चों की उचित परवरिश नहीं हो पाती।

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