कहीं आपकी कुंडली में तो नहीं है अशुभ केतु, ऐसे पता लगाएं और ये करें उपाय

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Published: 09 Oct 2020, 01:01 PM IST

कुंडली में स्थित 12 भावों पर अलग-अलग तरह से प्रभाव डालता है केतु...

Measures to cure Ketu in horoscope- कुंडली में केतु को ठीक करने के उपाय

नवग्रहों में केतु को दैत्य ग्रह माना जाता है। यह जिस भी स्थान पर बैठता है उस स्थान को अत्यंत प्रभावी बना देता है। यूं तो माना जाता है कि जब कभी राहु किसी जातक के लिए बुरा प्रभाव उत्पन्न करता है तब तब केतु उसके लिए अच्छा प्रभाव बनाता है। वहीं जब राहु अच्छा होता है तो केतु दोष उत्पन्न करने शुरु कर देता है। लेकिन यह भी सच है कि केतु ग्रह, कुंडली में स्थित 12 भावों पर अलग-अलग तरह से प्रभाव डालता है। इन प्रभावों का असर हमारे प्रत्यक्ष जीवन पर पड़ता है।

ज्योतिष में केतु एक क्रूर ग्रह है, परंतु यदि केतु कुंडली में मजबूत होता है तो जातकों को इसके अच्छे परिणाम मिलते हैं जबकि कमज़ोर होने पर यह अशुभ फल देता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार केतु का गोचर एक बड़ी ज्योतिषीय घटनाओं में से एक माना गया है। अगर केतु अपना राशि परिवर्तन करता है तो इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर कुछ ना कुछ अवश्य पड़ता है।

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ज्योतिष के जानकारों के अनुसार केतु एक छाया ग्रह है और इसका कोई भी अपना वास्तविक आकार या स्वरूप नहीं होता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में केतु अशुभ है तो इसकी वजह से जीवन में बहुत सी परेशानियां उत्पन्न होने लगती हैं, परंतु कुंडली में केतु ग्रह का मजबूत होना शुभ परिणाम की तरफ इशारा करता है। वहीं शुभ मंगल के साथ केतु की युति जातक को साहस प्रदान करती है। ऐसे में आखिर आप अपनी कुंडली में केतु की स्थिति कैसे देख सकते हैं? इस संबंध में आज हम आपकोजानकारी देने जा रहे हैं। साथ ही केतु के बुरे प्रभाव से छुटकारा पाने के कुछ उपाय भी बता रहे हैं...


कुंडली में केतु अशुभ होने के संकेत... bad signals of ketu

ज्योतिष के जानकार सुनील शर्मा के अनुसार केतु के अशुभ होने की स्थिति में हमें कई तरह के संकेत मिलने शुरु हो जाते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में हम इन्हें पहचान ही नहीं पाते, और ये ही कारण परेशानियों की वजह बनता है। ऐसे समझें केतु के अशुभ संकेत...
: यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में केतु अशुभ है तो उसको पैरों से संबंधित तकलीफ से उत्पन्न होने लगती है।

: कुंडली में केतु अशुभ होने की वजह से वाहन दुर्घटना में पैर में चोट लगने की संभावना रहती है, इसके अलावा पैरों में दर्द भी रहता है।

: केतु का सिर नहीं है बल्कि धड़ है। इसलिए यदि यह किसी व्यक्ति की कुंडली में अशुभ होता है तो शरीर के निचले हिस्से पर प्रभाव पड़ता है।

: केतु अशुभ होने की वजह से मूत्राशय से जुड़ी हुई परेशानियां और जोड़ों में दर्द की शिकायत उत्पन्न होने लगती है।

: अगर आपकी कुंडली में केतु अशुभ है तो आपको मानसिक परेशानियों से गुजरना पड़ेगा। आपका ध्यान इधर-उधर भटकता रहेगा। कानूनी विवाद में भी फंसने का भय बना रहता है।

: कुंडली में केतु की अशुभ स्थिति की वजह से आर्थिक परेशानियों से गुजरना पड़ता है। लगातार धन हानि होती रहती है। व्यापार में घाटा होने लगता है। हाथ में आया अच्छा अवसर भी निकल जाता है। पैतृक संपत्ति ना मिल पाने की स्थिति में यह केतु कमजोर होने का संकेत दर्शाता है।

: अगर लाख कोशिश करने के बावजूद भी आपको अपनी मेहनत का फल नहीं मिल पा रहा है तो आपको समझ लेना चाहिए कि आपकी कुंडली में केतु की स्थिति अशुभ है क्योंकि कुंडली में केतु शुभ नहीं होने की वजह से व्यक्ति चाहे कितनी भी मेहनत कर ले परंतु उसके अनुसार परिणाम नहीं मिल पाता है।

कुंडली में केतु को ठीक करने के उपाय : Measures to cure Ketu in horoscope

: अगर आप कुंडली में केतु की खराब स्थिति की वजह से परेशान हो रहे हैं तो ऐसे में आप ज्योतिष शास्त्र मैं बताए गए कुछ उपाय कर सकते हैं। केतु को मजबूत बनाने के लिए आप भगवान गणेश जी की आराधना कीजिए।

: कुंडली में केतु को मजबूत बनाने के लिए आप दो रंग वाले कुत्ते को रोटी खिलाएं, इससे जल्द ही आपको लाभ मिलेगा।

: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि कुंडली में कमजोर केतु को आप मजबूत बनाना चाहते हैं तो इसके लिए रत्न, जड़ी और रुद्राक्ष को धारण कर सकते हैं। इन तरीकों को अपनाकर केतु से मिलने वाले बुरे प्रभाव से छुटकारा प्राप्त हो सकता है।

ज्योतिष में केतु : Ketu in astrology
ज्योतिष में केतु ग्रह को एक अशुभ ग्रह माना जाता है। हालाँकि ऐसा नहीं है कि केतु के द्वारा व्यक्ति को हमेशा ही बुरे फल प्राप्त हों। केतु ग्रह के द्वारा व्यक्ति को शुभ फल भी प्राप्त होते हैं। यह आध्यात्म, वैराग्य, मोक्ष, तांत्रिक आदि का कारक होता है। ज्योतिष में राहु को किसी भी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। लेकिन धनु केतु की उच्च राशि है, जबकि मिथनु में यह नीच भाव में होता है। वहीं 27 रुद्राक्षों में केतु अश्विनी, मघा और मूल नक्षत्र का स्वामी होता है। यह एक छाया ग्रह है। वैदिक शास्त्रो के अनुसार केतु ग्रह स्वरभानु राक्षस का धड़ है। जबकि इसके सिर के भाग को राहु कहते हैं।


केतु का वैदिक मंत्र
ॐ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे।
सुमुषद्भिरजायथा:।।

केतु का तांत्रिक मंत्र
ॐ कें केतवे नमः।।

केतु का बीज मंत्र
ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः।।

भारतीय ज्योतिष के अनुसार केतु ग्रह व्यक्ति के जीवन क्षेत्र तथा समस्त सृष्टि को प्रभावित करता है। राहु और केतु दोनों जन्म कुण्डली में काल सर्प दोष का निर्माण करते हैं। वहीं आकाश मंडल में केतु का प्रभाव वायव्य कोण में माना गया है। कुछ ज्योतिषाचार्यों का ऐसा मानना है कि केतु की कुछ विशेष परिस्थितियों के कारण जातक यश के शिखर तक पहुँच सकता है। राहु और केतु के कारण सूर्य और चंद्र ग्रहण होता है।