आपके जीवन की दशा और दिशा तय करते हैं शनि, जानें किस भाव में देते हैं कौन सा फल

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Published: 11 Oct 2020, 05:06 PM IST

शनि का आपकी कुंडली पर क्या असर पड़ रहा है? How is Saturn impacting your horoscope?

शनि का प्रथम भाव में होने का असर क्या होता है What is the effect of Saturn being in the first house?

शनि का द्वितीय भाव में होने का असर क्या होता है What is the effect of Saturn being in the 2nd house?

शनि का कुंडली के तृतीय भाव में असर Saturn in 3rd house of horoscope

शनि का कुंडली के चतुर्थ भाव में असर Shani's influence in the 4th house of horoscope

शनि का हर भाव में असर कैसा होता है?

shanidev effect on the first house till the 12th house of kundali- शनि का प्रथम यानि लग्न भाव से 12वें यानि व्यय भाव तक पर असर

यूं तो ज्योतिष में नौ ग्रह हैं, लेकिन इन सभी ग्रहों के अपने अपने कार्य और अपने अपने ही प्रभाव भी है। जहां एक ओर मंगल देवसेनापति होकर व्यक्ति को पराक्रम प्रदान करता है, वहीं सूर्य ग्रहों के राजा होते हुए भी व्यक्ति की आत्मा होकर उसे मान—सम्मान की प्राप्ति कराते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन्हीं नौ ग्रहों में से कुछ ऐसे ग्रह भी हैं जो आपका भला करने पर आ जाए तो आपको कहां से कहा ले जाते हैं, वहीं यदि बुरा करने पर आएं तो आपका जीवन तक संकट में डाल देते है। ऐसे ग्रहों में मुख्य रूप से राहु व शनि का ही नाम आता है।

न्याय के देवता होने के कारण जहां अधिकांश लोग शनि को लेकर अत्यंत भयभीत रहते हैं, वहीं शनि यदि किसी को आशीर्वाद दे दें तो वह रंक से तक राजा का सफर तय आसानी से कर लेता है। शनि के संबंध में ये भी मान्यता है कि इनकी चाल की गति धीमी होने के कारण ये कार्य में देरी तो करते हैं, लेकिन जो भी कार्य करते हैं वह इतना ठोस होता है कि उसे कोई अन्य हिला तक नहीं पाता।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार क्या आप जानते हैं कि शनि एकमात्र ऐसे ग्रह हैं, जो हमारी कुंडली में किसी भी भाव में बैठकर हमारे जीवन की दशा और दिशा तय कर देते हैं। हमारे जीवन में सुख-दुख, रोमांच, ऐश्वर्या, मुसीबत, समस्या और संघर्ष सब कुछ तय कर देते हैं। एक जन्म कुंडली में 12 भाव होते हैं। शनि हर भाव में बैठ कर अलग परिणाम और फल देते हैं। शनि कुंडली के त्रिक भावों यानी छठे, आठवें और बारहवें भावों के कारक ग्रह हैं।

ऐसे समझें हर भाव पर शनि का असर...

1- लग्न यानि प्रथम भाव में शनि Saturn in 1st house:
यदि आपकी जन्मकुंडली में शनि पहले भाव यानी कुंडली के लग्न में हैं और शुभ स्थिति में होता हैं। तो वह व्यक्ति एक राजा के समान जीवन जीता है। यानी उसकी जिंदगी एश्वर्या पूर्ण रहती है। उसका सामाजिक व राजनीतिक रुतबा भी होता है और वह व्यक्ति नेतृत्व के गुणों से भी लैस होता है। ऐसे व्यक्ति को शराब और मांसाहारी भोजन के सेवन से बचना चाहिए और अगर वह बचा रहेगा तो शनि उसकी जिंदगी में बहुत सकारात्मक परिणाम देंगे।

2- द्वितीय यानि धन भाव में शनि Saturn in 2nd house:
कुंडली में दूसरे घर में शनि बैठे होते हैं, तो वह व्यक्ति बहुत बुद्धिमान, दयालु और न्याय कर्ता माना जाता है। वह आध्यात्मिक और धार्मिक स्वभाव का भी होता है। ऐसे व्यक्ति का भाग्योदय उसके जन्म स्थान या पैतृक निवास स्थान से दूर ही होता है। ऐसा व्यक्ति अपने परिवार से थोड़ा दूर रहता है। चाहे जीविका यानी कैरियर की वजह से, चाहे किसी अन्य कारण से।

3- तृतीय यानि पराक्रम भाव में शनि Saturn in 3rd house:
यदि कुंडली में तीसरे भाव में शनि होता है, वह व्यक्ति सेल्फमेड होता है यानी अपने दम पर और अपने संघर्ष के बलबूते जिंदगी में मुकाम हासिल करता है और ऐसे व्यक्ति को समाज में बहुत मान सम्मान की निगाह से देखा जाता है। उसे स्त्री सुख भी भरपूर मिलता है। अगर तीसरे भाव में शनि अशुभ स्थिति में बैठा हो तो वह व्यक्ति बहुत आलसी हो जाता है और उसकी प्रवृत्ति भी बहुत लो लेवल की हो जाती है।

4- चतुर्थ यानि सुख/माता का भाव में शनि Saturn in 4th house:
कुंडली के चौथे भाव में बैठा शनि ज्यादा शुभ नहीं माना जाता। ये कोई हेल्थ इशू दे देता है। ऐसे लोग कई बार जीवन में मकान बनाने से भी वंचित रह जाते हैं। यह स्थान माता का भी होता है और माता के लिए भी कोई न कोई कष्ट बना रहता है।

5- पंचम यानि पुत्र/बुद्धि के भाव में शनि Saturn in 5th house:
कुंडली के पंचम भाव में बैठा शनि व्यक्ति को बहुत रहस्यवादी बना देता है। यानि वह व्यक्ति अपने राज जाहिर नहीं करता और न ही अपनी भावनाएं दूसरों से शेयर करता है।उसे अपनी पत्नी और बच्चों की भी ज्यादा चिंता नहीं रहती और दोस्तों के बीच भी उसकी कोई खास अच्छी छवि नहीं होती।

6- छठे यानि शत्रु/रोग के भाव में शनि Saturn in 6th house:
कुंडली के छठा भाव से रोग व शत्रु स्थान भी कहा जाता है, वहां शनि बैठा होता है तो वह व्यक्ति अपने शत्रुओं पर हमेशा विजय हासिल करता है, वह बहादुर होता है और यदि साथ में केतु भी बैठे हो तो व्यक्ति धनी भी होता है लेकिन अगर छठे भाव में बैठा शनि वक्री अवस्था में हो या निर्बल हो तो आलसी और रोगी भी बना देता है । सिर पर कर्जा भी चढ़ा देता है।

सातवें यानि विवाह भाव में शनि Saturn in 7th house:
अगर कुंडली के सातवें भाव में शनि बैठा हो तो वह व्यक्ति व्यापार में काफी सफल रहता है। खासकर मशीनरी और लोहे का काम उसे काफी फलता है। सातवां भाग दांपत्य का भी कहलाता है और अगर वह व्यक्ति अपनी पत्नी से अच्छे संबंध नहीं रखता, तो शनि नीच और हानिकारक भी हो जाता है और व्यक्ति को अपने प्रोफेशन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

आठवें यानि आयु भाव में शनि Saturn in 8th house:
यदि कुंडली के अष्टम भाव में यानी आयु स्थान में शनि बैठा है तो वह व्यक्ति की आयु लंबी करता है। लेकिन, पिता के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता।

नवें यानि भाग्य भाव में शनि Saturn in 9th house:
कुंडली का नवम भाव भाग्य स्थान भी कहलाता है, ऐसे में यदि वहां शनि बैठा है तो वह व्यक्ति को बहुत पॉजिटिव नतीजे देता है और भाग्योदय करता है। इसका कारण ये भी है कि कुंडली में शुक्र भाग्य का कारक माना जाता है और शुक्र व शनि आपस में खास योग का निर्माण करते हैं। ऐसे व्यक्ति के जीवन में तीन घरों का सुख लिखा होता है। अगर कहीं उपलब्ध हो पाए तो ऐसे व्यक्ति को एक मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए।

दसवें यानि कर्म/पिता का भाव में शनि Saturn in 10th house:
कुंडली का दशम भाव जिसे राज दरबार और पिता स्थान भी कहा जाता है, वहां पर शनि अच्छे परिणाम देता है। ऐसा व्यक्ति सरकार से भी लाभ प्राप्त करता है और जीवन का पूरा आनंद लेता है बहुत से ब्यूरोक्रेट और मंत्रियों की कुंडली में भी शनि इसी बात में बैठा होता है और ऐसे व्यक्ति कभी-कभी नामी ज्योतिष भी बन जाते हैं।

11वें यानि आय भाव में शनि Saturn in 11th house:
जिस व्यक्ति की कुंडली में ग्यारहवें भाव में शनि बैठा हो, वह व्यक्ति बहुत धनी होता है, कल्पनाशील होता है और जिंदगी के सभी सुख प्राप्त करने वाला होता है और ऐसा व्यक्ति चापलूस भी होता है।

12वें यानि व्यय के भाव में शनि Saturn in 12th house:
अगर कुंडली के बारहवें भाव में शनि बैठा हो तो वह भी अच्छे परिणाम देता है। ऐसे व्यक्ति को परिवार सुख भी मिलता है और व्यापार में भी वृद्धि होती है। लेकिन अगर ऐसा व्यक्ति शराब पीना शुरू कर देता है या मांस खाता है तो शनि उस व्यक्ति का मन अशांत भी कर देते हैं और ऐसा व्यक्ति जीवन में परेशानी भी झेलता है।

नोट : यहां ये भी देखना जरूरी होता है कि शनि जिस किसी भी भाव में बैठा है वह किस राशि का घर है, क्योंकि आपको मिलने वाले फल उस भाव की राशि भी प्रभावित करेगी। जैसे यदि प्रथम भाव में शनि उचित फल देता है। लेकिन आपका लग्न कर्क यानि चंद्र का है तो वहां बैठे शनि का फल चंद्र के कारण तकरीबन पूरी तरह से बदल जाएगा।

शनि से जुड़ी सबसे खास बात Effects Of Shani In Life:
शनिदेव कर्म के विधान से बंधे होने कारण किसी अनुचित कर्म वाले को कभी अच्छा परिणाम नहीं देते हैं। वहीं वे बिना दंड दिए भी उसे नहीं छोड़तेे हैं, जबकि उचित कर्म करने वाले का शनिदेव कभी बुरा नहीं करते हैं, वहीं यदि वे अच्छे कर्म करने वाले से प्रसन्न हो जाएं तो उसे अपने आशीर्वाद से उचाइयों तक पहुंचा देते हैं। कुल मिलाकर अच्छा कर्म करने वालों पर शनि हमेशा मेहरबान रहते हैं और बुरा कर्म करने वालों को उनके इसी जीवन काल में दंडित भी करते हैं और ऐसा दंड देते हैं कि व्यक्ति तौबा करने लगता है। जिन लोगों के ऊपर हमेशा कष्ट, गरीबी ,बीमारी और धन संबंधी परेशानी होती है, उन्हें शनिदेव की पूजा जरूर करनी चाहिए।