FATF पर भारत की ओर से आ रही खबरों से परेशान पाकिस्तान, कहा- ग्रे लिस्ट को लेकर नहीं हुआ कोई फैसला

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Updated: 27 Jun 2020, 03:41 PM IST

Highlights

  • पाकिस्तान ने फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट में खुद को बरकरार रखने की खबरों को नकारा।
  • भारतीय मीडिया की खबरों को पाक ने फर्जी बताया- डिजिटल बैठक में नहीं हुआ कोई फैसला।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान (Pakistan) अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर दुनियाभर में चल रही खबरों से तंग का चुका है। उसने फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट में खुद को बरकरार रखने की खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। पाकिस्तान ने भारतीय मीडिया की खबरों को फर्जी बताया है। उसने कहा कि FATF की डिजिटल बैठक में अभी कोई भी निर्णय नहीं लिया गया है। पाकिस्तानी विदेश विभाग के अनुसार भारतीय मीडिया ऐसे झूठी खबर को चलाकर उसे बदनाम करने में लगा हुआ है।

पाकिस्तान ग्रे सूची में रहेगा

गौरतलब है कि पेरिस की संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने बीते बुधवार को एक बैठक के दौरान पाकिस्तान को ग्रे सूची (संदिग्ध सूची) में ही रहने दिया जाए। पाक का आरोप है कि वह लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को मिलने वाली फंडिंग पर रोक लगाने में असफल रहा है।

अभी भी नापाक हरकत में शामिल

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव के अनुसार गुरुवार को एफएटीएफ की ग्रे सूची में पाकिस्तान का बरकरार रहना, यह दर्शाता की पाकिस्तान अभी भी नापाक हरकत में शामिल है। उसने आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। इस पर पाकिस्तान के विदेश विभाग ने कहा कि भारत के अधिकारी भारतीय मीडिया में आई झूठी खबरों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।

2018 में डाला गया था ग्रे सूची में

पाकिस्तान को जून 2018 में ग्रे सूची में शामिल किया गया था। अक्टूबर 2018 और फरवरी 2019 में हुए रिव्यू में भी पाक को कोई राहत नहीं मिली थी। दरअसल पाक एफएटीएफ की सिफारिशों पर खरा नहीं उतरा था। इस दौरान पाकिस्तान में आतंकी संगठनों को विदेशों से और घरेलू स्तर पर आर्थिक भी प्राप्त हुई थी।

क्या है एफएटीएफ

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) एक अंतर-सरकारी निकाय है। इसे फ्रांस की राजधानी पेरिस में जी7 समूह के देशों द्वारा 1989 में बनाया गया था। इसका काम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग),सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार और आतंकवाद के वित्तपोषण निगरानी रखना है। एफएटीएफ अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली को दुरुपयोग से बचाने के लिए राष्ट्रीय स्तर की कमजोरियों की पहचान करने के लिए काम करता है। अक्टूबर 2001 में एफएटीएफ ने धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के अलावा आतंकवादी वित्तपोषण से निपटने के प्रयासों को शामिल किया।