कोरोना संकट: श्रीलंका में मुस्लिम मरीजों के शव जलाने पर बवाल, WHO से लगाई गुहार

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Updated: 04 Apr 2020, 03:48 PM IST

Highlights

  • मुस्लिम समुदाय का कहना है कि उन्हें अपने रीति रिवाज नहीं अपनाने दिए जा रहे।
  • 73 वर्ष के बिशरुल हाफी मोहम्म जुनूस की कोरोना वायरस से मौत हो गई थी।

कोलंबो। कोरोना वायरस से पूरी दुनिया परेशान है। श्रीलंका भी इस महामारी से लड़ रहा है। बीते दिनों इस बीमारी से मरने वाले दो मुसलमानों के शवों को दफनाने की जगह जला दिया गया। इससे यहां पर बवाल मच गया है। मुस्लिम समुदाय का कहना है कि उन्हें अपने रीति रिवाज से अंतिम संस्कार नहीं करने दिया जा रहा है। गौरतलब है कि श्रीलंका में अब तक 151 मामले दर्ज किए गए हैं।

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73 वर्ष के बिशरुल हाफी मोहम्म जुनूस की कोरोना वायरस से मौत हो गई। वह देश में दूसरे मुस्लिम हैं जिनका श्रीलंका में इस्लामिक रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार नहीं किया गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बिशरुल के बेटे फयाज जुनूस (46) ने बताया कि कि पिता की किडनी पहले से खराब थी। बाद में वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए। एक अप्रैल को उनकी मौत हो गई थी।

फयाज का आरोप है कि उन्हें इस्लामिक रिवाज के तहत जनाजा नहीं निकालने दिया गया, क्योंकि प्रशासन को डर था कि लोगों में संक्रमण फैल सकता है। फयाज ने कहा कि उनके पिता को पुलिस फोर्स की निगराने में एक वाहन में ले जाया गया। परिवार वालों ने शवदाह गृह के बाहर नमाज पढ़ी। मगर यह जनाजा नहीं था।

WHO का निर्देशों का उल्लंघन क्यों हो रहा

उन्होंने कहा कि सरकार को हम मुसलमानों के लिए प्रबंध करना चाहिए। वहीं मुस्लिम नेताओं का कहना है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के शवों को दफनाने या जलाने दोनों की इजाजत दी है फिर भी इसका उल्लंघन हो रहा है। उधर, मुस्लिम काउंसिल ऑफ श्रीलंका के वाइस प्रेजिडेंट हिल्मी अहमद ने कहा कि जब डब्ल्यूएचओ के निर्देश का पालन ब्रिटेन के साथ ज्यादातर यूरोपीय देश कर रहे हैं तो श्रीलंका क्यों नहीं कर रहा। ऐमनेस्टी इंटरनैशनल ने भी अल्पसंख्यकों की भावनाओं का ख्याल रखने की मांग की है।