बछ बारस आज: गाय और बछड़े की होगी पूजा, जानिए इसके पीछे क्या है मान्यता

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Published: 15 Aug 2020, 09:13 AM IST

इस दिन पुत्रवती महिलाएं गाय व बछड़े का पूजन करती हैं और व्रत रखती हैं । अपने पुत्रों के सुख और दीर्घायु की कामना करती हैं।

अलवर . भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को बछ बारस या गोवत्स द्वादशी कहते हैं। इस दिन गाय और उसके बछड़े की पूजा की जाती है।

ममत-मतांतर के कारण यह पर्व 15 या 16 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन पुत्रवती महिलाएं गाय व बछड़े का पूजन करती हैं और व्रत रखती हैं । अपने पुत्रों के सुख और दीर्घायु की कामना करती हैं।. इस दिन स्त्रियां मूंग, मोठ और बाजरा अंकुरित कर गाय के बछड़े को खिलाती हैं। व्रती स्त्रियों को भी आहार में यही अन्न लेना होता है।. इस दिन गाय का दूध काम में लेना सर्वथा वर्जित माना जाता है।

पंडित तपेश अवस्थी ने बताया कि गोपाष्टमी और गोगा नवमी के साथ-साथ बछ बारस का भी विशेष महत्व है। शनिवार को दोपहर 2:20 तक एकादशी तिथि है इसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। उन्होंने बताया कि बछबारस पर्व को मनाने के पीछे मान्यता है कि इस दिन श्रीकृष्ण पहली बार गाय चराने घर से बाहर निकले थे। यह माता यशोदा और पुत्र कृष्ण के बीच प्रेम के जीवंत उदाहरण का प्रतीक पर्व है।