Ahmedabad-mumbai high speed corridor पर बनेंगे 28 स्टील पुल, लगेगा 70 हजार टन स्टील

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Published: 06 Feb 2021, 08:05 PM IST

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गांधीनगर. अहमदाबाद-मुंबई हाईस्पीड रेल कॉरिडोर (Ahmedabad-mumbai rail corridor) पर 28 स्टील पुल (Steel bridge) बनेंगे, जिसमें करीब 70 हजार हजार टन स्टील का उपयोग होगा। इसके लिए नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (National high speed rail corridor) ने स्टील की खरीदा और निर्माण के लिए ठेका दे दिया है। ये स्टील पुल हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के रेलवे लाइनों, नदियों, राजमार्गों, सड़क तथा अन्य संरचनाओं के लिए बनेंगे। करीब 1390 करोड़ रुपए का अनुबंध लार्सन एंड टुब्रो-आइएचआई इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम्स (कंसोर्टियम) को दिया गया है। यह भारतीय और जापानी कंपनियों का एक कंसोर्टियम है।

यह अनुमान है कि इन स्टील पुलों के निर्माण के लिए लगभग 70,000 टन स्टील का उपयोग होगा। ऐसा होने से भारतीय इस्पात उद्योगों और उनकी संबद्ध आपूर्ति श्रृंखलाओं को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। इन स्टील पुलों के निर्माण के लिए भारतीय स्टील उत्पादक, उच्च कोटि का इस्पात प्रदान करेंगे। भारत के पहले हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की इतनी बड़ी मांग को पूरा करने के लिए एनएचएसआरसीएल ने पहले ही इस्पात उद्योगों को सतर्क कर दिया है।
एनएचएसआरसीएल ने पहले से ही 64 फीसदी अहमदाबाद-मुंबई हाइस्पीड रेल संरेखण के सिविल निर्माण-कार्य के लिए ठेका दे दिया है जिसमें पांच हाईस्पीड रेल स्टेशन बनेंगे, जो वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, आणंद एवं नडियाद और सूरत में ट्रेन डिपो और 350 मीटर की एक पर्वतीय सुरंग शामिल है।

508 किमी की लंबाई में से, अहमदाबाद-मुंबई हाई-स्पीड रेल की अधिकतम दूरी को वायाडक्ट (खंभे) से कवर किया जाएगा, जिसमें मुंबई के पास 21 किलोमीटर लंबी सुरंग शामिल नहीं है। कई स्थानों पर इस कॉरिडोर का वायाडक्ट (487 किलोमीटर) राष्ट्रीय राजमार्गों, समर्पित फ्रेट कॉरिडोर ट्रैक्स, भारतीय रेलवे ट्रैक्स और नदियों पर होकर गुजरेगा। अधिकांश वायाडक्ट कंकरीट से बनेंगे। हालांकि, जहां स्पान की आवश्यकता 60 मीटर से अधिक होगी, स्टील सुपरस्ट्रक्चर की योजना बनाई गई है।

स्टील के पुलों निर्माण में भारतीय कंपनियों को शामिल करने का निर्णय कुल मिलाकर, 28 स्टील पुलों का, 60 मीटर से 130 मीटर तक अलग-अलग स्पान के साथ, परियोजना के लिए निर्माण किया जाएगा। एक साथ सभी स्टील के पुलों की लंबाई लगभग 4.5 किमी होगी और उनके निर्माण में 70,000 टन से अधिक इस्पात शामिल होगा।