अब पुलिस जवानों की पत्नियों ने खोला मोर्चा, कहा- 24 घंटे की ड्यूटी से बिगड़ रहा मानसिक संतुलन

By: Ram Prawesh Wishwakarma

Updated On: Jun, 22 2018 03:02 PM IST

  • वेतन विसंगति को लेकर तहसीलदार से मांगी रैली निकालने की अनुमति, कहा- काम का दबाव होता है काफी अधिक

अंबिकापुर. छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग के परिवार वालों ने अब 11 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन करने की अनुमति प्रशासन से मांगी है। परिवार के सदस्यों ने इसके लिए बाकायदा एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर 20 जून की सुबह 11 बजे बंगाली चौक से रैली निकालने की अनुमति मांगी है। पुलिस जवानों की पत्नियों व परिजन का कहना है कि 24 घंटे की ड्यूटी जवानों से ली जाती है लेकिन उनका ग्रेड-पे 8 घंटे की ड्यूटी करने वाले शिक्षकों, नर्सिंग स्टाफ व पटवारियों से काफी कम है।


पुलिस विभाग के अधिकारियों व जवानों को सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन नहीं करने के निर्देश उनके सेवा अनुबंध में उल्लेखित है। इसकी वजह से आज भी उन्हें पुरानी व्यवस्था के तहत भत्ता व अन्य सुविधाएं मिलते आ रही है। लेकिन अब इसे लेकर पुलिस विभाग के जवान व अधिकारी तो नहीं, लेकिन उनके परिवार के लोग विरोध करना शुरू कर दिए हैं।

परिवार की महिलायें व अन्य सदस्यों ने तृतीय वर्ग कर्मचारियों के ग्रेड-पे में भारी विसंगतियों का उल्लेख करते हुए कहा है कि पुलिस विभाग का एक आरक्षक 24 घंटे की ड्यूटी करता है। ऐसे में काम का दबाव मानसिक स्थिति को बिगाड़ देता है। एक आरक्षक का ग्रेड-पे वर्तमान में 1900 रुपए है। जबकि पटवारी का ग्रेड-पे 2400 रुपए, नर्सिंग स्टाफ का 2800 रुपए है।

24 घंटे ड्यूटी करने की वजह से पुलिस अधिकारियों व आरक्षकों की मानसिक स्थिति बिगड़ रही है। इसकी वजह से गलत निर्णय लेकर किसी भी हादसे को अंजाम देना उनकी कुंठा का परिणाम है। पुलिस विभाग के अधिकारी व जवान परिवार को काफी कम समय दे पाते है और अल्प वेतन में काम करना जीवन में केवल निराशा पैदा करता है।

वेतन विसंगति को दूर करने की मांग को लेकर पुलिस परिवार के सदस्यों ने एसडीएम अजय त्रिपाठी को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों के समर्थन में 20 जून को बंगाली चौक से रैली निकालने की अनुमति मांगी है। इस दौरान सुशीला सिंह, संध्या सिंह आशा महंत, सीता सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित थे।


राजनीतिक हस्तक्षेप से दूर रखने की मांग
पुलिस परिवार के सदस्यों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि प्रदेश में पुलिस व्यवस्था की हालत इसलिए भी खराब है कि इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप काफी अधिक है। सभी जानते हैं कि राजनीतिज्ञों को अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए पुलिस की जरूरत पड़ती है। इससे वे पुलिस व्यवस्था में काफी अधिक हस्तक्षेप करते हैं।


नीति निर्धारकों ने भी नहीं दिया ध्यान
पुलिस विभाग में कार्यरत कर्मचारियों को आज भी पुरानी व्यवस्था के तहत भत्ता व अन्य सुविधाएं प्रदान की जाती है। वर्तमान में अधिकांश पुलिस कर्मचारी बाइक चलाते हैं लेकिन उन्हें भत्ता साइकिल का दिया जाता है।

पुलिस विभाग के परिवार के सदस्यों ने ज्ञापन में बताया कि एक प्राइमरी स्कूल का शिक्षक जो 8 घंटे की ड्यूटी करता है उसे 35 हजार रुपए का भुगतान किया जाता है। जबकि 24 घंटे की ड्यूटी करने वाले आरक्षक को महज १८ हजार रुपए वेतन दिया जाता है।


कचरे के डिब्बे में डाल दी जाती है अनुशंसा
परिवार के सदस्यों ने बताया वर्ष 1902 से पुलिस व्यवस्था में सुधार करने की कवायद की जा रही है। राष्ट्रीय पुलिस आयोग ने भी समय-समय पर सुझाव सरकार को दिए हैं, उसे भी राजनीतिक नेतृत्व कचरे के डिब्बे में डाल रहा है।

Published On:
Jun, 19 2018 12:42 PM IST

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