अलवर . मुस्लिम समाज की ओर से मोहर्रम शहादत के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर रोड नंबर दो स्थित मेव बोर्डिंग से दोपहर 1 बजे ताजिए निकाले गए। पहले ताजिए की परंपरागत रूप से पूजा की गई फिर प्रसाद बांटा गया। मेव बोर्डिंग से दो ताजिए निकाले गए जिसे समाज के लोग अपने कंधे पर उठाए हुए थे। महिलाएं भी ताजियों के पीछे पीछे चल रही थी। छोटा ताजिया नंगली कोता मौहल्ले से एक दिन पहले ही रात को यहंा लाया गया था। यहां से निकलकर ताजिए भगत सिंह चौराहा, अंबेडकर सर्किल होते हुए जेल का चौराहा पर पहुंचेंगे। यहां पर दशहरा मैदान में स्थित करबला में शाम करीब 6 बजे ताजियों को दफन किया गया। ताजिए देखने के लिए हजारों की संख्या में समुदाय के लोग शहर में आए। ताजिए के दौरान लोगों ने ताजिए के नीचे से बच्चों को निकालकर उनकी लंबी आयु की कामना की। इस दौरान यहां पर मेले जैसा माहौल बना हुआ था। यहां पर जगह जगह पर मीठे पानी की प्याऊ लगाई गई थी। जिसमें लोग जल सेवा कर रहे थे।ग्रामीण क्षेत्रों से मेव समुदाय के लोग ट्रक्टर ट्राली सहित अन्य वाहनों में भरकर यहां पहुंचें। खेल खिलौने, चाट पकौडी, कपडे, फल , मिठाईयां आदि की खूब बिक्री हुई। महिलाओं ने आर्टिफिशिल ज्वैलरी खरीदी। ताजिए के दौरान अलग अलग गांवों के आई पैंक पार्टियां भी बाजे की धुन पर नाचते कुदते शामिल हुई। सभी पैंक पार्टियों ने अलग अलग डे्रस पहनी हुई थी। जिससे वो अलग से ही नजर आ रहे थे। ताजिए के दौरान करीब दो घंटे तक इन सभी मार्गो पर यातायात व्यवस्था बाधित रही। इसके लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। जिला प्रशासन भी पूरी तरह से नजर रखे हुआ था।

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