अलवर में करीब 155 साल पुरानी है भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा, भगवान जगन्नाथ की भक्ति के रंग में रंगा हुआ है अलवर

By: Hiren Joshi

Published On:
Jul, 11 2019 11:23 AM IST

  • alwar jagannath mahotsav : अलवर में जगन्नाथ महोत्सव 155 सालों से मनाया जा रहा है। पहले इंद्रविमान को हाथी खींचते थे, अब ट्रैक्टर खींचते हैं।

अलवर. अलवरवासियों के कण- कण में भगवान जगन्नाथ विराजमान हैं, यहां से जुडा हर व्यक्ति भगवान जगन्नाथ की भक्ति के रंग में रंगा हुआ है। भगवान के प्रति इसी आस्था के चलते अलवर में निकलने वाली जगन्नाथ रथयात्रा देश में सबसे अलग होती है। जगन्नाथपुरी में भगवान जगन्नाथ रथयात्रा का जो स्वरूप नजर आता है, उसी तरह का स्वरूप अलवर में निकलने वाली जगन्नाथ यात्रा का होता है। अलवर में करीब 155 सालों से यह रथयात्रा निकाली जा रही है। लेकिन यहां निकलने वाली रथयात्रा देश की अन्य रथयात्राओं से अलग है, यहां पर भगवान जगन्नाथ को विष्णु व माता जानकी को लक्ष्मी मानकर प्रतिवर्ष विवाह करवाया जाता है।

इंद्रविमान में सवार होकर निकलते हैं भगवान जगन्नाथ

भगवान जगन्नाथ जिस रथ में सवार होकर रूपबास पहुंचते हैं, उसे इंद्रविमान के नाम से जाना जाता है। सजे धजे इंद्रविमान रथ में विराजमान होकर जब भगवान जगन्नाथ निकलते हैं तो इस रथ की रौनक और बढ़ जाती है। यह रथ पूर्व महाराज जयसिंह के समय का बनाया गया था। पहले इस रथ को हाथियों से खींचा जाता था लेकिन अब इसे टै्रक्टर से ले जाया जाता है। भहलीनुमा यह रथ दो मंजिला है। ऊचाई अधिक होने के कारण इसके निकलने से पहले रास्ते में पेड़ों की टहनियों व तारों को हटाया जाता है। इसमें छह बड़े पहिये लगे हुए हैं। प्रतिवर्ष इसकी मरम्मत होती है। यह करीब 15 फीट चौडा व 25 फीट लंबा होता है। इस रथ के चारों और झरोखे बने हुए हैं। रथयात्रा के दौरान रथ को फूलों व रंग बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है। इससे रथ की सुदंरता और बढ़ जाती है।

मेले में रहती है भीड़, प्रशासन संभालता है इंतजाम

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा पुराना कटला स्थित जगन्नाथ मंदिर से रवाना होकर रूपबास पहुंचती है। करीब 15 दिन तक मेले के कार्यक्रम चलते हैं। लेकिन पांच दिन विशेष भीड़ रहती है। रूपबास में लगने वाले मेले में हजारों लोग भगवान के दर्शन करते हैं और मेले में खरीददारी करते हैं। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से करीब 1 माह पूर्व ही तैयारियां शुरु कर दी जाती है। शहर की यातायात व्यवस्था भी बदली जाती है।

करीब 250 साल से ज्यादा पुराना है मंदिर

जिला मुख्यालय पर पुराना कटला स्थित जगन्नाथ मंदिर करीब 250 साल से भी अधिक पुराना है। शहर से करीब 6 किलोमीटर दूर रूपबास स्थित रूपहरि मंदिर में भगवान जगन्नाथ व जानकी मैया के विवाह की रस्म निभाई जाती है। इसके लिए भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा बैंडबाजे के साथ निकाली जाती है। जिसे रूपबास तक पहुंचने में करीब 7 से 8 घंटे लग जाते हैं। मंदिर में आयोजित होने वाला वरमाला महोत्सव सबसे खास होता है। जिसमें भगवान के फेरे करवाए जाते हैं।

मंदिरों में होती है जगन्नाथ की आरती

भगवान जगन्नाथ रथयात्रा के मार्ग में करीब 50 मंदिर स्थित हैं, जब रथयात्रा मंदिरों के सामने से निकलती है तो सभी मंदिरों में उनकी आरती उतारी जाती है। इसके चलते यह रथयात्रा करीब 8 घंटे में रूपबास पहुंचती है। देर रात तक मंदिरों में भगवान की रथयात्रा आने का इंतजार किया जाता है। भगवान जगन्नाथ व जानकी के विवाह की रस्म पूरी होने के बाद रथयात्रा वापस लौटती है तो उस समय भी मंदिरों में भगवान की आरती उतारी जाती है।

वर माला में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का दूसरा बडा आकर्षण होता है वरमाला महोत्सव। देवशयन एकादशी को भगवान का विवाह होता है। जिसे देखने के लिए श्रद्धालु घंटों पहले ही मंदिर में पहुंच जाते हैं। जब पंडित भगवान जगन्नाथ व जानकी का विवाह करवाते हैं तो मंदिर परिसर जय जगन्नाथ व जय जानकी के जयकारों से गंूज जाता है। त्रयोदशी के दिन भगवान जगन्नाथ जानकी के संग रथ में वापस लौटते हैं।

Published On:
Jul, 11 2019 11:23 AM IST

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