अलवर की जगन्नाथ रथ यात्रा देख कई भक्तजनों को रामचरित मानस में वर्णित साक्षात रामचन्द्र जी की बारात का दृश्य याद आ जाता है। तब गोस्वामी तुलसीदास लिखते हैं ‘रामहि देखि बरात जुड़ानी, प्रीति कि रीत न जाए बखानी’। आगे जब सब राम के दर्शन करते हैं तो लिखा है ‘सबहिं मन ही मन किए प्रणामा, देखि राम भए पूरणकामा’। जगन्नाथ रथयात्रा में बुधवार को जब शहरवासियों को जगदीश जी के दर्शन हुए तो कुछ ऐसी ही अनुभूति हुई।
घंटे-घडिय़ाल और शंखनाद की मधुर ध्वनि के बीच बुधवार को पूरा शहर श्रद्धा और आस्था से सराबोर नजर आया। अवसर था भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का। भगवान जगन्नाथ को शुभ घडी में इंद्र विमान में विराजमान होकर जानकी मैया को ब्याहने निकले तो शहरवासी भगवान जगन्नाथ की दूल्हा रूपी मनमोहक छवि के दर्शन पाने को उमड़ पड़े। रथयात्रा का जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया और भगवान जगन्नाथ की आरती उतारी गई। पुराना कटला सुभाष चौक स्थित जगन्नाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद शाम करीब 7 बजे भगवान जगन्नाथ को गर्भगृह से निकालकर इंद्र विमान में विराजमान कराया गया। पूजा अर्चना में जिला कलक्टर इंद्रजीत सिंह व जिला पुलिस अधीक्षक परिस देशमुख शामिल हुए। पुलिस जवानों की ओर से भगवान जगन्नाथ को गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
शहरवासी बने बाराती
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में हजारों शहरवासी उमड़े। रथयात्रा के शुरू होने पर सुभाष चौक स्थित जगन्नाथ मंदिर से शहरवासी बाराती बन भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के साथ नाचते-गाते निकले। कम्पनी बाग रोड पर भगवान जगन्नाथ के दर्शन पाने के लिए हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे। रात करीब साढ़े 12 बजे रथयात्रा नंगली सर्किल पर पहुंची। वहां श्रद्धालुओं की इतनी भीड़ थी कि पैर रखने तक की जगह नहीं थी। मेले में अखाडाबाजी का प्रदर्शन लोगों को आकर्षित कर रहा था। देव देवताओं की झांकियों से आस्था झलक उठी।
मेला स्थल रूप बास में जगन्नाथ जी की रथयात्रा पहुँचने पर मेला शुरू हो गया झूले और खाने पीने की स्टाल लग गयी श्रद्धालु भगवान् जगन्नाथ जी के दर्शन करने और मेला घूमने रूप बास पहुंचे

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