पुलिस अभिरक्षा से बंदी के भागने पर हाईकोर्ट ने दिया निर्देश, कहा- जरूरी है जांच की कार्रवाई

By: Sarweshwari Mishra

Updated On: Sep, 16 2018 02:41 PM IST

 
  • किस वजह से जांच करना व्यवहारिक नहीं है और बिना जांच के कार्रवाई जरूरी है

इलाहाबाद. पुलिस अभिरक्षा से बंदी के भागने पर संबंधित कांस्टेबल की बिना कारण बताए बर्खास्तगी अनुचित है। हाईकोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामलों में यह बताया जाना चाहिए किस वजह से जांच करना व्यवहारिक नहीं है और बिना जांच के कार्रवाई जरूरी है। इस कारण का उल्लेख करना आवश्यक है। कोर्ट के इस आदेश के बाद प्रमुख सचिव गृह ने हलफनामा देकर बताया कि सभी संबंधित पुलिस अधिकारियों को इस बात के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। ऐसे मामलों में बिना जांच के कार्रवाई करने का कारण स्पष्ट करने का निर्देश जारी कर दिया गया है।

 


पुलिस सिपाही होशियार सिंह सहित आगरा, फिरोजाबाद, कानपुर आदि के दर्जनों पुलिसकर्मियों की याचिकाओं को एक साथ निस्तारित करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने दिया। कोर्ट ने याचीगण की बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर दिया है। याचीगण के अधिवक्ता विजय गौतम की दलील थी कि सपाहियों की अभिरक्षा से मुल्जिमों के भाग जाने की स्थिति में 1991 की नियमावली के नियम 8 (2) (डी) के तहत बिना जांच किए दोषी पुलिसकर्मी की बर्खास्गी का प्रावधान है। मगर ऐसा करते समय संबंधित अधिकारी द्वारा इस बात का उल्लेख करना अनिवार्य है कि किन कारणों से जांच करना व्यवहारिक नहीं है।

 


याचीगण की बर्खास्तगी में संबंधित अधिकारियों ने जांच नहीं करने के कारण का उल्लेख नहीं किया है इसलिए बर्खास्तगी आदेश अवैध है। कोर्ट ने इस मामले में प्रमुख सचिव गृह से हलफनामा मांगा था। प्रमुख सचिव ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि नियम 8 (2) (डी) का प्रयोग करने को लेकर शासनादेश जारी कर दिया गया है जिसमें निर्देश दिया गया है कि संबंधित अधिकारी जांच न करने का कारण बताना अनिवार्य है।

Published On:
Sep, 16 2018 02:41 PM IST

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