> > > >So be prepared and Kom met Milkha facility

सुविधा मिले तो तैयार हों मिल्खा और मेरीकॉम

2016-04-28 04:27:49


सुविधा मिले तो तैयार हों मिल्खा और मेरीकॉम
उदयपुर।चिलचिलाती धूप। हलक सूखे और न ही पैर में जूते। कुछ इसी तरह की तस्वीर आदिवासी क्षेत्रों की है, जहां गरीब बच्चे टापरे-टापरे दस्तक देकर विद्यार्थियों को प्रवेश दिलाने के लिए अभिभावकों को प्रेरित कर रहे हैं। बच्चे सरकार के प्रवेशोत्सव का फरमान पूरा कर रहे हंै लेकिन सरकार इनको सुविधा की दृष्टि से दरकिनार कर रही है। शिक्षकों ने बताया कि ये गरीब बच्चे बिना चप्पल व जूते के बड़ी से बड़ी पहाडि़यां आसानी से चढ़ जाते हंै। ऐसी प्रतिभाओं को अगर खेल क्षेत्र के लिए तैयार किया जाए तो हर एक आदिवासी गांव से मेरीकॉम व मिल्खा सिंह जैसे सितारे निकल सकते हैं। लेकिन इनकी सुध लेने वाला यहां कोई नहीं है।

यह है खेल बजट की स्थिति

प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में विद्यालय सुविधा अनुदान, विद्यालय मरम्मत अनुदान के अलावा कोई बजट जारी नहीं किया जाता है। माध्यमिक, उच्च माध्यमिक विद्यालयों के लिए विद्यालय क्षेत्रीय, जिला, राज्य विद्यालयी खेल प्रतियोगिता व राष्ट्रीय प्रतियोगिता के चयन परीक्षण के लिए खिलाडि़यों को दैनिक भत्ता 70 रुपए से 100 रुपए व राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता में खेल गणवेश के लिए 500 रुपए से 750 दिया जाता है। इसमें 50 प्रतिशत छात्र स्वयं व 50 प्रतिशत छात्र कोष से चुकाया जाता है। इसमें पहले छात्रों को 250 रुपए देने होते थे लेकिन अब 375 रुपए देने होते हैं। साथ ही 375 रुपए छात्र कोष मिलाते हैं।


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