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कैम्पर-टैंकर पर अटकी जिंदगी

2016-04-28 04:26:16


कैम्पर-टैंकर पर अटकी जिंदगी
उदयपुर।वक्त शहर के स्मार्ट होने का है। मुख्य सड़कें, पार्क चकाचक हो रहे हैं वहीं, शहर की पांच विकसित कॉलानियों में निवासरत करीब पांच हजार परिवार पिछले दस वर्षों से पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे हंै। यह आबादी पानी के लिए केम्पर और टैंकर पर ही निर्भर है। यहां जिक्र नाकोड़ा नगर प्रथम, द्वितीय और तृतीय, सौभाग्यनगर और इसके आसपास की कॉलानियों के दर्द का किया जा रहा है। ये सभी कॉलोनियां दस वर्ष पूर्व से बसना शुरू हो गई थी और सभी यूआईटी से स्वीकृत है। कॉलानी बनने के साथ ही यहां सड़क, बिजली और अन्य सुविधाएं तो मुहैया करा दी गई पर, पानी के नाम पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

बड़ा बजट पानी में खर्च : कॉलोनी के अधिकांश परिवारों को हर माह दो से तीन हजार रुपए पानी के इंतजाम पर खर्च करने पड़ रहे हैं। जलस्तर काफी नीचे होने से बोरवेल भी काम नहीं करते हंै, जहां पानी है वहां फ्लोराइड की मात्रा काफी ज्यादा होने से पीने योग्य नहीं है। कई घरों में तो दो से ज्यादा बोरवेल कराने के बाद भी पानी नहीं आया है।

दो महकमों में उलझ गई कॉलोनी

पानी के लिए कॉलोनीवासियों ने बीते दस वर्ष में पांच सौ से ज्यादा ज्ञापन यूआईटी और जलदाय विभाग को दिए। दोनों ही महकमे एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हंै। परेशान होकर क्षेत्रवासियों ने गत वर्ष पंचायती चुनाव में बहिष्कार की चेतावनी दी तो विधायक फूलसिंह मीणा ने शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया और विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया। इसके परिणाम स्वरूप करीब 46 करोड़ की डीपीआर भी बनी और सर्वे भी हुआ पर बजट के नाम पर कुछ नहीं मिला। इसके बाद क्षेत्रवासियों ने सम्पर्क पोर्टल पर शिकायत की तो अंडर प्रोसेस बता कर शिकायत ही निस्तारित कर दी। इस बारे में जलदाय विभाग के अधिशाषी अभियंता से बात की तो उन्होंने उच्चाधिकारियों के स्तर का मामला होना बताया।
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