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अनोखी होली- चलते राहगीर को उठाकर फेंक देते थे गोबर में

2017-03-12 17:35:06


<b>अनोखी होली- </b>चलते राहगीर को उठाकर फेंक देते थे गोबर में<br>
जबलपुर। संस्कारधानी की होली अपने आप में निराली हुआ करती थी। यहां चलते राहगीर को रंग से भरे फुहारा में फेंक दिया जाता था, इतने के बावजूद राहगीर बुरा मानने के बजाये हंसता हुआ सबसे मिलता था। बड़ा फुहारा में ऐसी ही होली हुआ करती थी। हालांकि आज भी जबलपुर की होली में वहीं मिठास और मित्रता है जो दशकों पहले हुआ करती थी।
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हुरियारों के गजब ढंग
पहले के समय में होली में शालीनता नहीं हुआ करती थी। चंदा न देने वाले लोगों के घर के सामने कचरा और गंदगी से भरे मटके फोड़ दिए जाते थे। वहीं बड़े से हौज में रंगों की जगह गोबर घोलकर उसमें लोगों को जबरदस्ती डुबोया जाता था।
शालीनता से मनाएं पर्व

वक्त बीतने के साथ होली मनाने का स्वरूप भी बदल गया है। अब लोग शालीनता के साथ होली मनाते हैं। बस इसी शालीनता के दौरान यह ध्यान में रखें कि तेज आवाज के गीतों और रंगों की मस्ती में दूसरे लोगों को परेशानी न उठाने पड़े।
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मूर्ख सम्मेलन के अलग रंग
दिन भर होली के रंगों से सराबोर होने के बाद रात को मूर्ख सम्मेलन होता था। जिसमें स्थानीय लोग और रहवासी अपनी अजब-गजब कविताओं से माहौल को हंसी-खुशी से भर देते थे। शहनाई की धुन, गुजिया का स्वाद और होली की उमंग में हर कोई सराबोर रहता था।
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