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वाई-फाई से राज्य में पंचायतों तक पहुंचेगा ई-गवर्नेंस

2017-03-20 22:32:36


वाई-फाई से राज्य में पंचायतों तक पहुंचेगा ई-गवर्नेंस
बेंगलूरु।सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के क्षेत्र में देश की अगुवाई करने वाले राज्य के पंचायतों को वाई-फाई से जोडऩे की योजना डिजिटल और मोबाइल गवर्नेंस को आगे बढ़ाने वाली साबित होगी। हालांकि, सूखे से जूझ रहे राज्य के किसानों और ग्रामीण परिस्थितियों को देखते हुए वाई-फाई योजना की आलोचना भी हो रही है।

दरअसल, राज्य में कुल 6019 ग्राम पंचायत है और सिद्धरामय्या सरकार ने वित्तीय वर्ष 2017-18 के बजट में 2500 पंचायतों को नि:शुल्क वाई-फाई से जोडऩे की घोषणा की है।
इस योजना को कियोनिक्स की अगुवाई में निजी-सार्वजनिक भागदारी के तहत लागू किया जाएगा और पहले चरण की परियोजना के लिए 50 करोड़ की राशि आवंटित भी की गई है। कर्नाटक देश का पहला ऐसा राज्य है जो वाई-फाई जैसी सेवाओं को सुदूर ग्रामीण इलाकों तक ले जा रहा है। राज्य के आईटी-बीटी मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा कि हम मैसूरु, गदग और कलबुर्गी जिले की 11 ग्राम पंचायतों में इसका परीक्षण कर रहे हैं।

यह परीक्षण नवम्बर 2016 से चल रहा है। लोगों का रुख काफी सकारात्मक है और वे इसे स्वीकार कर रहे हैं।Óइस योजना को बीएसएनएल के सहयोग से कियोनिक्स लागू करेगा। खरगे ने बताया कि राज्य के ग्राम पंचायतों में बापूजी केंद्रों और ई-गवर्नेंस कियोस्क के कारण पहले से ही नेटवर्क का जाल बिछा है। उस क्षमता को बढ़ाया जा रहा है और अप्रेल अंत तक 2500 ग्राम पंचायतों तक ब्राड-बैंड सुविधा पहुंचा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि आस-पास के स्कूल-कॉलेजों को भी वाई-फाई सुविधा पहुंचाने की योजना है और अगर घरों में भी लोग इसकी मांग करेंगे तो निजी मकानों तक भी यह सुविधा पहुंचाई जाएगी।

ब्राड बैंड सेवा होगी काफी सस्ती

उधर, नॉसकॉम के एक अधिकारी ने कहा कि बहुत जल्दी ब्राड बैंड जैसी सेवाएं काफी सस्ती हो जाएंगी। नॉसकॉम कार्यकारी परिषद के सदस्य रवि गुरुराज के मुताबिक अगर गांव और सुदूर क्षेत्र बिना तारों के जाल बिछाए जुड़ जाते हैं तो यह एक बड़े लक्ष्य की प्राप्ति मानी जाएगी। यह किफायती और शानदार प्रयोग होगा लेकिन इसके लिए परियोजना का निष्पादन सही तरीके से करना होगा।

यह डिजिटल कर्नाटक और ग्रामीण सशक्तिकरण की सबसे बेहतर परियोजना होगी। हालांकि, ग्राम पंचायतों को वाई-फाई से जोडऩे की योजना डिजिटल इंडिया के साथ ही गुड गवर्नेंस को आगे बढ़ाने वाली मानी जा रही है लेकिन सूखा संकट से जूझ रहे किसानों को कितना प्रभावित करेगी इसको लेकर संशय है।

किसान नेता जे.सी बय्या रेड्डी का कहना है कि सरकार पंचायती राज प्रणाली को सशक्त बनाना चाहती है और इसलिए वाई-फाई योजना का लाभ दीर्घावधि में मिलेगा। इससे गांवों तक ई-गवर्नेंस पहुंचेगा। लेकिन सवाल यह है कि सूखे और फसल नुकसान के कारण निराश किसानों को यह योजना उत्साहित कर पाएगी। जब किसानों के सामने आजीविका का संकट है तो वाई-फाई को कितनी प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

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