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7 साल की देरी के कारण 4 गुना हुई लागत

2017-03-20 22:34:48


7 साल की देरी के कारण 4 गुना हुई लागत
बेंगलूरु।सरकार अगले महीने नम्मा मेट्रो के 42 किमी लंबे पूरे खंड पर परिचालन शुरु करने का ऐलान कर चुकी है। धीमी रफ्तार के कारण के न सिर्फ इस परियोजना को पूरा होने में सात साल की देरी हो चुकी है बल्कि लागत भी प्रारंभिक अनुमान की तुलना में चार गुणा हो चुकी है।

42.3 किमी के पहले चरण की लागत 14 हजार 405 करोड़ रुपए होगी। यानी हर किलोमीटर पर लागत 340 करोड़ रुपए की हुई जबकि प्रारंभिक प्राक्कलन के मुताबिक यह दर सिर्फ 145 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर थी। एक दशक पहले निर्माण कार्य शुरु होने के बावजूद धीमी रफ्तार और बढ़ती महंगाई के कारण चार बार परियोजना के खर्च को संशोधित किया गया। वर्ष 2006 में 33 किमी नेटवर्क वाले पहले चरण को केंद्र सरकार ने मंजूरी दी थी। उस वक्त इसकी लागत 6395 करोड़ रुपए अनुमानित थी। बाद में नेटवर्क का दायरा बढ़ाकर मौजूदा 42.3 किमी किए जाने पर फिर अनुमानित परियोजना राशि को संशोधित किया गया।

विस्तारित खंड के साथ अनुमानित खर्च बढ़कर 8158 करोड़ रुपए हो गया। निर्माण कार्यों में देरी के कारण वर्ष 2011 में अनुमानित खर्च बढ़कर 11 हजार 609 करोड़ रुपए हो गया। धीमी रफ्तार से निर्माण कार्य के कारण वर्ष 2015 तक लागत अनुमान बढ़कर 13 हजार 845 करोड़ रुपए हो चुका था। बार-बार समय सीमा चूकने के कारण अनुमानित लागत में वृद्धि जारी रहने के कारण पहले चरण का काम पूरा होने तक खर्च बढ़कर 14 हजार करोड़ से ज्यादा हो जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक पहले चरण का अद्यतन अनुमोदित लागत 14 हजार 405 करोड़ रुपए है और इसमें अब किसी बदलाव की जरुरत नहीं है। जनवरी 2017 तक मेट्रो रेल निगम पहले चरण के विकास पर 14 हजार 291 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है। हालांकि, मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि अगर कर को छोड़ दें तो कुल खर्च 13 हजार 845 करोड़ रुपए ही है।
मेट्रो रेल निगम के वित्तीय रिपोर्ट के मुताबिक परियोजन की लागत का सिर्फ 58.91 फीसदी हिस्सा यानी 8155.54 करोड़ रुपए ही केंद्र व राज्य सरकार ने वहन किया है।
बाकी 41.09 फीसदी यानी 5689.47 करोड़ रुपए की राशि देशी-विदेशी वित्तीय संस्थानों से ऋण के तौर पर जुटाई गई है। नम्मा मेट्रो को वित्त 2015-16 में 60.35 करोड़ रुपए का परिचालन घाटा हुआ। इस अवधि में मेट्रो रेल निगम का राजस्व 48.46 करोड़ रुपए था जबकि व्यय 108.88 करोड़ रुपए रहा।

मेट्रो रेल का पहला चरण मार्च 2010 में ही पूरा हो जाना था लेकिन इसके बाद से मेट्रो रेल निगम 9 बार घोषित समय सीमा चूक चुका है। मेट्रो रेल निगम का बैयप्पनहली से एम जी रोड के बीच 6.7 किमी का पहला खंड 2011 में चालू हुआ था। इसके बाद चरणों में कई खंड चालू हुए। उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर के भूमिगत खंड पर परिचालन शुरु होने के बाद पहला चरण पूरा हो सकेगा।

दूसरे चरण में भी देरी

सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अब तक यथास्थिति बताने के लिए पिछले सप्ताह लांच किए गए ऑनलाइन सरकारी प्लेटफार्म प्रतिबिंबÓ के मुताबिक नम्मा मेट्रो के दूसरे चरण में 36 फीसदी की लेटलतीफी है। इस तरह देखा जाए तो फरवरी 2014 से शुरू हुए दूसरे चरण को निर्धारित समय 2020 तक पूरा करना मुश्किल है। कार्य की यही प्रगति रहती है तो इस चरण के 2022-23 में पूर्ण होने की संभावना है। मेट्रो रेल निगम भौतिक रूप से 8 फीसदी और आर्थिक रूप से 11 फीसदी काम ही अब तक पूरा कर सका है। दूसरे चरण का काम 2020 तक पूरे किए जाने का लक्ष्य है।

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