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Photo इस शिला पर बैठते ही समाधि में चले जाते थे ओशो, लगती है दर्शकों की भीड़

2017-03-20 20:00:47


<img src=http://img.patrika.com/upload/icons/photo.png alt=Photo Icon title=Photo Icon valign=middle width=16 height=16 /> इस शिला पर बैठते ही समाधि में चले जाते थे ओशो, लगती है दर्शकों की भीड़
जबलपुर। ओशो एक ऐसा नाम जिसने पूरी दुनिया में आध्यात्म की अलख जगाई। प्रेम का पाठ पढ़ाया। 21 मार्च को ओशा संबोधि दिवस मनाया जाएगा। अनुयायी आज भी उस स्थान पर पहुंचते हैं जहां से ओशा ने धर्म का प्रकाश फैलाते थे। संस्कारधानी आचार्य रजनीश की कर्म, ज्ञान और साधना भूमि रही है। यह पूरे विश्व में उनके अनुयायियों का प्रमुख स्थल है। उनकी तपोस्थली की शिला में आज भी ओशो को महसूस किया जाता है। आचायज़् रजनीश देवताल में अंतरराष्ट्रीय ओशो अध्यात्म केंद्र बनाना चाहते थे, लेकिन अनुयायियों को होने वाली कठिनाईयों को देखते हुए उन्होंने महाराष्ट्र के पुणे शहर को चुना। क्योंकि वहां हवाई सेवा के साथ अन्य सभी सुविधाएं सहजता से उपलब्ध थीं।
600 से ज्यादा लिखी पुस्तकें
इतना महत्वपूर्ण स्थान होने के बाद भी देवताल केन्द्र में आने वाली सड़क दुर्दशा का शिकार है। किंतु स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधि इस ओर कोई ध्यान नहीं देते। आज पूरे विश्व में जहां इंटरनेट का बोल-बाला है, इसके बाद भी हर दूसरे मिनिट में ओशो साहित्य की एक किताब की बिक्री होती है। ओशो ने करीब 600 पुस्तकें लिखीं। संभोग से समाधी की ओर सबसे चचिज़्त साहित्य रहा है।



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100 विदेशी भाषाओं में अनुवाद
उनके चाहने वालों ने सभी साहित्य को लगभग 100 विदेशी भाषाओं में अनुवादित कर दुनिया के कोने-कोने में फैलाने का कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही रशिया, चाइना एवं अरब जैसे कम्युनिस्ट देशों में भी अब ओशो पढ़े और सुने जा रहे हैं। इसका मुख्य कारण है कि ओशो में किसी प्रकार का जातीय धार्मिक पाखंड नहीं है। यहां सिफज़् खुशहाल जीवन जीने का वैज्ञानिक दृष्टिकोण मिलता है। इसी के साथ नेट, मोबाइल और सीडी में भी ओशो वाणी लोगों की पसंद बनी हुई है।
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ओशो दर्शन पर पीएचडी
ओशो के आध्यात्मिक जीवन की प्रसिद्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके जीवन पर सैकड़ों लोगों ने पीएचडी कर ली है। ओशो के शिक्षा दर्शन, नारी दर्शन, आध्यात्मिक, दार्शनिक और जीवन दर्शन सहित विभिन्न पहलु शामिल हैं। वर्तमान में भी बहुत से लोग पीएचडी कर रहे हैं। आचार्य रजनीश द्वारा व्यक्त किए गए विचार साथ और मार्ग आज भी प्रासंगिक हैं।


हर पहलू पर रखे विचार
उन्होंने मानव जीवन से जुड़े हर पहलू पर कायज़् किया और लोगों को आत्म शांति के साथ अध्यात्म का रास्ता दिखाया। उन्होंने संस्कृति की अपेक्षा स्वयं के विकास पर ज्यादा जोर दिया। ताकि विकृत संस्कृतियों को बढ़ावा न मिले। स्वामी शिखर ने बताया कि ओशो ने पाया कि पाश्चात्य संस्कृति में भौतिक शांति जरूर मिल जाती है लेकिन अंत में मन की शांति के लिए वे भारत का रुख करते हैं। पूरे विश्व में ओशो आत्म शांति के सबसे बड़े उदाहरण है।
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