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चंद्रशेखर राव टीआरएस के फिर अध्यक्ष

2017-04-21 13:38:00


चंद्रशेखर राव टीआरएस के फिर अध्यक्ष
हैदराबाद: तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव को शुक्रवार को तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) की वार्षिक बैठक में एकमत से एक बार फिर पार्टी अध्यक्ष चुन लिया गया है। टीआरएस के निर्वाचन अधिकारी और राज्य के गृह मंत्री नयिनी नरसिम्हा रेड्डी ने आठवीं बार राव के पार्टी अध्यक्ष चुने जाने की घोषणा की।
नरसिम्हा रेड्डी ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष के पद के लिए केवल उनका नामांकन ही मिला था। केसीआर के नाम से मशहूर राव 2001 में पार्टी के गठन के बाद से इस पद पर हैं। तेलंगाना को 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग राज्य का दर्जा दिया गया था। टीआरएस ने उसी साल हुए चुनाव में जीत हासिल करके नए राज्य में पहली सरकार गठित की थी।


के चंद्रशेखर राव: एक परिचय
के चंद्रशेखर राव का पूरा नाम कलाकुंडला चंद्रशेखर राव है संक्षेप में इन्हें केसीआर भी कहते हैं। इनका जन्म 17 फरवरी 1954 को हुआ है। केसीआर अलग तेलंगाना राज्य आंदोलन के प्रमुख कार्यकर्ता हैं। वे तेलंगाना के मेढक जिले के गजवेल विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। उन्होने 2 जून 2014 को तेलंगाना राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
इसके पूर्व वे सिद्धिपेट से विधायक तथा महबूबनगर और करीमनगर से सांसद रह चुके हैं। वे केंद्र में श्रम और नियोजन मंत्री रह चुके हैंके चंद्रशेखर राव ने एक छात्र नेता के रूप में राजनीतिक जीवन शुरू किया। इससे पहले वे एक रोजगार सलाहकार थे, जो कामगारों को खाड़ी देशों में भेजते थे। 1985 में वे तेलुगु देशम पार्टी में शामिल हुए और विधायक चुने गए। 1987-88 तक वे आंध्रप्रदेश में राज्यमंत्री रहे। 1992-93 तक वे लोक उपक्रम समिति के अध्यक्ष रहे। 1997-99 तक वे केंद्रीय मंत्री रहे। 1999 से 2001 तक वे आंध्रप्रदेश विधानसभा में उपाध्यक्ष रहे।


अलग तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर किया था टीआरएस का गठन
तेलंगाना राष्ट्र समिति के गठन से पहले वे तेलुगु देशम पार्टी के सदस्य थे। उन्होंने अलग तेलंगाना राज्य के निर्माण की मांग करते हुए तेलगू देशम पार्टी छोड़ दी थी। तेलंगाना राष्ट्र समिति कांग्रेस के साथ मिलकर 2004 में लोकसभा चुनाव लड़ी थी और उसे पांच सीटें मिलीं। जून 2009 तक वे संप्रग सरकार में थे, लेकिन अलग तेलंगाना राज्य पर संप्रग के नकारात्मक रवैये के कारण उन्होंने संप्रग से नाता तोड़ लिया।
1999 से 2001 तक वे आंध्रप्रदेश विधानसभा में उपाध्यक्ष रहे। इस पद से इस्तीफा देने के बाद तेलगू देशम से बाहर आ गए और एकसूत्रीय एजेंडा के तहत तेलंगाना राष्ट्र समिति की स्थापना की। 2004 में वे करीमनगर से लोकसभा सदस्य चुने गए। 2006 में उन्होंने अलग तेलंगाना राज्य की मांग करते हुए संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और फिर भारी बहुमत से सांसद चुने गए। 2008 में भी अलग तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर उन्होंने अपने तीन सांसदों और 16 विधायकों के साथ फिर इस्तीफा दिया और दूसरी बार सांसद चुने गए।
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