> > > Doomsday Clock time cut down by 3 minutes

3 मिनट पीछे हुई कयामत की घड़ी, दुनिया पर मंडराया बर्बादी का खतरा

2017-01-27 12:24:22


3 मिनट पीछे हुई कयामत की घड़ी, दुनिया पर मंडराया बर्बादी का खतरा
नई दिल्ली। दुनिया के नष्ट होने वाले समय की सूचना देने वाली काल्‍पनिक घड़ी का समय मध्‍यरात्रि से 3 म‍िनट पहले का तय कर दिया गया है। इसका मतलब कयामत की घड़ी (Doomsday Clock) के मुताबिक दुनिया बर्बादी की कगार पर काफी करीब पहुंच चुकी है। इस घड़ी में दुनिया के खात्मे का समय कम करने का यह फैसला परमाणु खतरे और ग्‍लोबल वॉर्मिंग को देखते हुए बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्‍ट्स ने लिया है।
डूम्सडे क्लॉक है बताती है ऐसा समय
डूम्सडे क्लॉक यानी धरती पर मंडरा रहे खतरों का आकलन करने वाले वैज्ञानिकों के मुताबिक पिछले 3 साल में क्लाइमेट चेंज और परमाणु हथियारों के कारण धरती पर मंडरा रहा खतरा इतना बढ़ चुका है कि दुनिया कभी भी खत्म हो सकती है। इसके अलावा पहले आंके गए समय में अब 3​ मिनट और कम कर दिए गए हैं।
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3 और पहले हुई कयामत की घड़ी
इसी के चलते वैज्ञानिकों ने काल्पनिक डूम्सडे क्लॉक को रात्रि 12 बजे से 3 मिनट पहले पर सेट कर दिया है। इसका मतलब ये है कि धरती के खात्मे का खतरा बहुत ज्यादा बढ चुका है।
आपको बता दें कि इस घड़ी को 68 साल पहले शुरू किया गया था। शिकागो के अटॉमिक साइंटिस्ट्स के बुलेटिन को तैयार करने वाले लोग ही इस क्लॉक को सेट करते हैं। बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्‍ट्स के एक्‍िजक्‍यूटिव डायरेक्‍टर रैशल ब्रॉन्‍सन के मुताबिक पिछले 20 सालों में दुनिया की बर्बादी का समय काफी करीब पहुंच चुका है।
इसलिए बढा दुनिया के खात्मे का खतरा
एरिजोना स्‍टेट यूनिवर्सिटी के कॉस्‍मोलॉजिस्‍ट और प्रोफेसर लॉरेंस क्रूस के मुताबिक ग्‍लोबल वॉर्मिंग, आतंकवाद, अमरीका और रूस के बीच परमाणु तनाव, उत्‍तर कोरिया के ह‍‍थियारों की चिंता, पाक-भारत के बीच तनाव अस्थिरता फैलाने वाले हैं। उन्‍होंने कहा कि वर्ष 2015 से इस घड़ी के समय में बदलाव नहीं करना अच्‍छी बात नहीं है।
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क्या है डूम्सडे क्लॉक अथवा कयामत की घड़ी
यह धरती पर मंडरा रहे खतरों का आकलन करने वाली एक काल्पनिक घड़ी है। इसको 1947 में बनाया गया था तथा शुरुआती समय 7 से 12 मिनट रखा गया था। उस समय हिरोशिमा और नागासाकी पर एटमी हमले हुए थे। इसके बाद से अब तक 18 बार मिनट सुई को आगे या पीछे किया जा चुका है। इससे पहले 2012 में भी इसकी मिनट सूई बढ़ाई गई थी और तब भी परमाणु बम और क्लाइमेट चेंज का खतरा बढ गया था।
यह घड़ी बनाने वाली टीम जीत चुकी है 16 नोबेल पुरस्‍कार
आपको बता दें कि इस घड़ी में टाइम सेट करने वाली टीम 16 नोबेल पुरस्‍कार जीत चुकी है। इसीलिए इस कयामत की घड़ी को काफी गंभीरता से लिया जाता है। इसके मुताबिक जब धरती के अस्तित्‍व को खतरा होता है तो इसकी मिनट की सुई को रात्रि 12 बजे के करीब कर दिया जाता है। जब संप‍न्‍नता होती है, तो इसके समय को बढ़ा दिया जाता है। 1953 में इसे 12 बजने में दो मिनट पहले तय किया गया था और 1991 में 17 मिनट पहले तय किया गया था।
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