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...इस तरह सुरक्षित है डिजिटल वॉलेट से लेनदेन, जानिए क्या है नियम

2017-03-16 09:49:15


...इस तरह सुरक्षित है डिजिटल वॉलेट से लेनदेन, जानिए क्या है नियम
डिजिटल पेमेंट ट्रांसफर के मामले में अधिकांश यूजर्स को यह डर होता है कि कहीं उनका पैसा फंस ना जाए। इसके चलते बड़ी संख्या में लोग इसे अपनाने से झिझकते हैं। पत्रिका के प्रीतेश गुप्ता के साथ बातचीत में पेटीएम फाउंडर विजय शेखर शर्मा ने बताया किस तरह से वॉलेट का इस्तेमाल बिल्कुल सुरक्षित है।

वॉलेट यूजर्स के सामने पैसे की सुरक्षा बड़ा सवाल है। ऐसे में सेफ्टी के लिए उनके पास क्या-क्या विकल्प हैं?

आईटी एक्ट में बिल्कुल स्पष्ट तौर पर इसके नियम हैं। वॉलेट बिल्कुल मोबाइल बैंकिंग की तरह से काम करता है। वॉलेट और मोबाइल बैंकिंग के लिए नियम बिल्कुल एक जैसे हैं। एक कंज्यूमर के तौर पर आपको जो अधिकार मोबाइल और नेट बैंकिंग में मिले हैं, वे ही वॉलेट में भी मिलते हैं। आरबीआई ने स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है कि यदि ग्राहक की मंजूरी के बिना वॉलेट से अमाउंट डेबिट होता है तो रिफंड की जिम्मेदारी वॉलेट कंपनी की होगी। अपने स्तर पर आरबीआई के कहे बिना ही हमने ओटीपी के रूप में एक एक्स्ट्रा पासवर्ड अपनी प्रोसेस में एड किया है।

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बैंक अकाउंट में पैसा रखने पर ब्याज मिलता है। क्या वॉलेट अमाउंट पर भी कैशबैक या इस तरह का कोई बेनिफिट देने की योजना?

वॉलेट सिर्फ पेमेंट के लिए बनाया गया था। आरबीआई की गाइडलाइंस के मुताबिक वॉलेट में डिपॉजिट अमाउंट पर ना तो हम ब्याज कमा सकते हैं ना ही कंज्यूमर को इसका लाभ दे सकते हैं। वैसे भी हिसाब लगाएं तो 1000 रुपए जमा करने पर आपको महीने में 3 रुपए से ज्यादा ब्याज नहीं मिलेगा, इतना तो कैशबैक के रूप में फायदा वैसे भी मिल ही जाता है। इस हिसाब से बैंक डिपॉजिट से भी वॉलेट ज्यादा प्रॉफिटेबल है। हम बहुत जल्दी पेटीएम का पेमेंट बैंक लॉन्च करने की तैयारी में हैं। ऐसा होने के बाद आपको अमाउंट वॉलेट में रखने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। आप सीधे बैंक अकाउंट में ही रखकर काम चला सकते हैं।

भविष्य में क्या आप आरबीआई या सरकार से इस तरह के नियमों में कोई छूट चाहते हैं?

अभी सामान्य उपयोग पर वॉलेट से लेनदेन की लिमिट 20 हजार रुपए मासिक है। केवायसी के बाद यह लिमिट 25 हजार रुपए हो जाती है। यह अमाउंट बहुत कम है, हमारा मानना है कि एक लाख रुपए प्रति महीने तो कम से कम होना चाहिए। आरबीआई वैसे काफी प्रो-एक्टिवली काम करता है। हम भी ऐसी ही कोशिश करते हैं, ताकि डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिल सके।

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कस्टमर केयर सर्विस को लेकर काफी शिकायतें हैं, इसको लेकर कोई एग्रेसिव प्लानिंग?

बिल्कुल सही शब्द है, एग्रेसिव। इसी की जरूरत है। 8 नवंबर के बाद और पहले की स्थिति की तुलना करें तो ग्राहकों के सवालों की तादाद में बहुत ज्यादा फर्क देखने को मिला है। सच तो यह है कि अचानक आए इस मौके पर हम तेजी से कस्टमर केयर एक्जीक्यूटिव्स नहीं बढ़ा पाए। लेकिन अब हमने वाइजेग, विशाखापटनम और जबलपुर जैसे कई छोटे, बड़े और मध्यम शहरों में कॉल सेंटर ऑपरेट किए हैं, फिलहाल ओडिशा में काम कर रहे हैं। उत्तर से दक्षिण तक इस पर काम किया है। आईवीआर सुविधा 24 घंटे के लिए शुरू की है, ताकि किसी भी समय यूजर कॉल कर सके। जहां तक मेल का सवाल है हम सभी को मैनुअली रिप्लाय करते हैं, ऑटो रिप्लाय का इस्तेमाल नहीं करते। नोटबंदी के बाद टिकट्स में तेजी के चलते जवाब देने में मुश्किलें आ रही थीं। इसलिए हमने कॉमन प्रॉब्लम्स को सोशल मीडिया और मीडिया के जरिये भी हल करने की कोशिश की है।

बाकी वॉलेट्स की तुलना में पेटीएम बाकी ऑप्शन्स से कैसे बेहतर है

देखिए, वैसे सभी वॉलेट्स की अपनी-अपनी खास बातें हैं। पेटीएम की हम बात करें तो हमने कोशिश की है कि इसे ज्यादा से ज्यादा तरीकों से इस्तेमाल किए जाने लायक बनाया है, उदाहरण के लिए हमने पेमेंट प्रक्रिया में क्यूआर कोड शुरू किया जिससे प्रोसेस में तेजी आई है, अब धीरे-धीरे सभी इसको फॉलो करेंगे। इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा जगहों पर पेटीएम का विकल्प देने की उपलब्धता सुनिश्चित करने की कोशिश की है यही सबसे बड़ा अंतर है। पहले लोगों को वॉलेट से इंट्रोड्यूस करना और फिर वॉलेट में क्यूआर कोड जोड़ना ये हमारे सिस्टम की देन है।

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