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NOTA या सांसद! रतलाम में 62 फीसदी मतदान में 24 हजार ने सबको नकारा

2015-11-26 11:44:29


NOTA या सांसद! रतलाम में 62 फीसदी मतदान में 24 हजार ने सबको नकारा

भोपाल।
मतदाताओं की नापसंदगी का बटन नोटा बता रहा है कि जनता का आक्रोश कितना मुखर हो रहा है। रतलाम चुनाव परिणाम में नोटा तीसरे स्थान पर है। यह पार्टी और उसके प्रत्याशियों के लिए चिंता का कारण बन गया है।
भारत विश्व में यह 14वां लोकतांत्रिक देश है जहां नन आफ द एबव (नोटा) का हथियार मिला है। पब्लिक चाहे तो यह बटन आगे चलकर राइट टू रिकॉल भी बन सकता है।
नोटा जनप्रतिनिधियों को आईना दिखाने, दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने और उन्हें पटरी पर रखने के लिए कारगर व्यवस्था है।
रतलाम में तीसरे स्थान पर नोटा
रतलाम लोकसभा में नोटा को 24 हजार 426 और देवास विधानसभा उपचुनाव में 1460 वोट मिले। इससे पहले 2014 के आम चुनाव में अकेले रतलाम में 30 हजार 364 मतदाताओं ने नोटा चुना था। यानी उन्हें एक भी प्रत्याशी पसंद नहीं था।
विधानसभा चुनाव-2013
6 लाख 43 हजार ने दबाया नोटा
मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव के दौरान 6 लाख 43 हजार 144 मतदाताओं ने ईवीएम और डाक मतपत्र में नोटा का प्रयोग किया था। सबसे अधिक नोटा का इस्तेमाल छिन्दवाड़ा जिले में हुआ जहाँ 7 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में 39 हजार 235 लोगों ने नोटा दबाया था। भिण्ड जिले में सबसे कम 3378 मतदाताओं ने किसी भी नेता को पसंद नहीं किया।
लोकसभा चुनाव-2014
3 लाख 91 हजार ने दबाया नोटा
मध्यप्रदेश में 29 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में हुए चुनाव में 3 लाख 91 हजार 797 मतदाताओं ने ईवीएम और डाक-मतपत्र में नोटा यानि इनमें से कोई नहीं का इस्तेमाल किया। नोटा का सबसे ज्यादा उपयोग रतलाम में हुआ, जहाँ 30 हजार 364 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया।


मंदसौर जिले का गरोठ उपचुनाव
मंदसौर जिले के गरोठ विधानसभा क्षेत्र में हुए उप चुनाव में 1924 मतदाता ने नोटा का बटन दबाया।
नोटा का भी प्रचार होना चाहिए
मतदाताओं का मानना है कि जितना प्रचार वोट डालने का होता है, नोटा का प्रचार नहीं किया जाता है। नेता कभी प्रचार नहीं करते और चुनाव आयोग भी इसका प्रचार नहीं करता, इसका फायदा नेता उठाते हैं। इसी हिसाब से नीति बना लेते हैं।
60 लाख मतदाताओं ने दबाया नोटा
16वें लोकसभा चुनाव में देशभर में करीब 60 लाख मतदाताओं ने उपरोक्त में से कोई भी नहीं (नोटा) का विकल्प चुना और पुडुचेरी में सबसे अधिक इसका इस्तेमाल हुआ, यहां 22,268 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना।

बिहार में नोटा का कमाल
हाल ही में बिहार में हुए विधानसभा चुनाव में 9 लाख 13 हजार 561 मतदाताओं ने तरजीह दी। भाजपा ने जीतनराम मांझी को अति पिछड़ों का मानकर अपने साथ रखा, लेकिन उनकी पार्टी से अधिक वोट नोटा में ही चले गए।
हिमाचल में सलाह, नोटा का प्रयोग न करें
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए भी नोटा का इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि चुनाव आयोग ने मतदाताओं को इसका प्रयोग न करने की सलाह दी है। गुरुवार को हो रहे मतदान में स्पीति घाटी की 13 में से 10 पंचायतों को पहले ही निर्विरोध घोषित कर दिया गया है। वहीं चम्बा जिले की 29 पंचायतों के लिए मतदान आज हो रहा है।

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