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बंडीपुर वन क्षेत्र के नीचे सुरंग में दौड़ेगी ट्रेन!

2017-03-20 22:26:43


बंडीपुर वन क्षेत्र के नीचे सुरंग में दौड़ेगी ट्रेन!
बेंगलूरु।केरल के नीलांबर से नंजनगुड़ के बीच नया रेलमार्ग बिछाने का प्रस्ताव बंडीपुर रिजर्व को छेड़े बिना भी पूरा किया जा सकता है। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) इस संबंध में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बना रहा है।

डीएमआरसी के प्रमुख सलाहकार ई.श्रीधरन ने दो दिन पहले ही यहां मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या के साथ इस सिलसिले में बातचीत की थी। बताया गया है कि उन्होंने वन विभाग की चिंताओं का समाधान करते हुए बंडीपुर रिजर्व फॉरेस्ट एरिया को सुरक्षित छोड़ते हुए इस रेलमार्ग को बनाने का विकल्प सरकार को बता दिया है।

प्रस्तावित नीलांबर-नंजनगुड़ रेलमार्ग का करीब 11 किमी लंबा हिस्सा बंडीपुर रिजर्व फॉरेस्ट से होकर गुजरता है। वन विभाग का कहना है कि सुुरक्षित वन क्षेत्र से रेलमार्ग का गुजरना वन्य जीवन के लिए बेहद हानिकारक साबित होगा। इस प्रस्तावित रेलमार्ग का एक तिहाई हिस्सा कर्नाटक में रहेगा।

इस रेलमार्ग को लेकर शुरू में किए गए सर्वे के मुताबिक नीलांबर-नंजनगुड़ रेलमार्ग करीब 236 किमी लंबा बनाने की योजना थी। बाद में श्रीधरन की टीम ने दोबारा इसका सर्वे किया और इसे घटाकर 154 किमी तक ले आए। यह योजना पिछले 10 साल से फाइलों की धूल चाट रही है। जानकारों का कहना है कि श्रीधरन ने पर्यावरण संबंधी शंकाओं के समाधान के लिए वैकल्पिक योजना प्रस्तुत कर दी है।

सुरंग से होगा समाधान

श्रीधरन का सुझाव है कि नीलांबर-नंजनगुड़ रेलमार्ग का करीब 11 किमी लंबा वह हिस्सा जो बंडीपुर रिजर्व फॉरेस्ट से होकर गुजरेगा, उसे जमीन के अंदर संरग बनाकर निकाला जा सकता है। इस तरह वन्य जीवन को कोई नुकसान नहीं होगा और रेल यातायात से भविष्य में भी किसी प्रकार की परेशानी पैदा नहीं होगी।

श्रीधरन ने सुरंग खोदने के लिए टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) के इस्तेमाल का सुझाव दिया है। यह ठीक वैसा ही है, जैसा बेंगलूरु में नम्मा मेट्रो के लिए भूमिगत मार्गों की खुदाई के लिए किया गया था। जंगल के नीचे से जमीन के अंदर रेलमार्ग बिछाने से वन्य जीवन को कोई नुकसान नहीं होगा।

अभी यह हैं समस्याएं

बंडीपुर वन क्षेत्र से रेलमार्ग बनाने के लिए रेलवे को वन और पर्यावरण मंत्रालय से कई तरह की अनुमतियां लेने की जरूरत होगी। इसके लिए परियोजना रिपोर्ट में इस बात का विस्तार से उल्लेख करना होगा कि इस परियोजना से वन्य जीवन परकैसा असर पड़ेगा और भविष्य में इसके क्या परिणाम होंगे। लेकिन सुरंग मार्ग का विकल्प चुनने पर इन तमाम परेशानियों से बचा जा सकेगा।

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