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गांवों के विकास में होगा उपग्रह तकनीक का उपयोग

2017-04-20 00:59:49


गांवों के विकास में होगा उपग्रह तकनीक का उपयोग
बेंगलूरु।भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अत्याधुनिक उपग्रह अब जमीनी स्तर पर देश के शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे। जल्दी ही राज्य के मेंगलूरु जिले के 56 ग्राम पंचायतों का पूर्ण ब्यौरा उपग्रह तैयार करेंगे और उंगली के एक इशारे पर तमाम जानकारियां उपलब्ध होंगी। दरअसल, इसरो और कर्नाटक सरकार के बीच पायलट परियोजना के तौर पर शुरू की गई भुवन पंचायतÓ के जरिए जिले के सभी पंचायतों की संपत्तियों और संसाधनों की जियो टैगिंग भुवन पोर्टल पर की जाएगी।
इसरो ने जियो टैगिंग की जिम्मेदारी राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी) हैदराबाद को सौंपी है। एनआरएससी हैदराबाद के ए.टी जयशीलन ने बताया कि इस परियोजना के तहत उपग्रहों के जरिए पूरे गांव का पोर्टफोलियो तैयार किया जाएगा। इसमें गांवों में उपलब्ध सुविधाएं, जनसंख्या, परिसंपत्तियां आदि का विवरण होगा। इससे भविष्य में गांव की जरूरतों के हिसाब से योजनाएं तैयार की जा सकेंगी और विकास योजनाओं को लागू किया जा सकेगा। यह पंचायतों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

उपग्रह प्रक्षेपण के 42 साल पूरे
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार को उपग्रह प्रक्षेपण के 42 साल पूरे कर लिए। स्वदेशी तकनीक से निर्मित इसरो के पहले उपग्रह आर्यभट्टÓ ने 19 अप्रेल 1975 को उड़ान भरी थी। लगभग 36 0 किलोग्राम वजनी इस संचार उपग्रह का प्रक्षेपण तत्कालिन सोवियत संघ के प्रक्षेपण यान सी-1 इंटरकॉस्मोस ने वोल्गोग्राद प्रक्षेपण स्थल से किया था। उपग्रह प्रक्षेपण के 42 साल पूरे होने पर इसरो ने कहा है कि इन वर्षों में भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। देश के पहले उपग्रह का नाम पांचवीं सदी के सुविख्यात खगोलशास्त्री एवं गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया।

जो इंदिरा गांधी ने रखा था। इसरो ने इसका निर्माण अंतरिक्ष में उपग्रह संचालन का अनुभव हासिल करने के उद्देश्य से किया था। एक बहुभुज के आकार का यह अंतरिक्षयान 1.4 मीटर व्यास का था। उपग्रह को 6 माह के अभियान पर भेजा था मगर पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करने के 4 दिन बाद ही जब उपग्रह ने 60 परिक्रमा पूरे किए, ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो गई और प्रयोग रुक गए। प्रक्षेपण के पांचवे दिन उपग्रह से संकेत मिलने बंद हो गए। आर्यभट्ट का प्रक्षेपण अंतरिक्ष में प्रयोग करने का पहला प्रयास था और इसने देश में तकनीकी उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया। आज इसरो जिस मुकाम पर खड़ा है उसकी नींव आर्यभट्ट का प्रक्षेपण ही है।
एचएएल हो सकता है इसरो का प्रमुख भागीदार
उपग्रहों के प्रक्षेपण की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए इसरो निजी क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इसके लिए इसरो एक संयुक्त उपक्रम तैयार करने की प्रक्रिया में है जो निजी उद्योगों के एक कंसोर्टियम के साथ बनेगा। सूत्रों के मुताबिक इसरो के इस संयुक्त उपक्रम में सार्वजनिक क्षेत्र की विमान निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) तथा लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) प्रमुख साझीदार होंगे।

हालांकि, उपक्रम तैयार करने की प्रक्रिया अभी शुरू हुई है और पूर्ण ब्यौरा कैबिनेट की मंजूरी के बाद मिलेगा लेकिन इस संयुक्त उपक्रम में आधे दर्जन कंपनियों को रखे जाने की उम्मीद है। हाल ही में इसरो अध्यक्ष एएस किरण कुमार ने कहा था कि हम इस व्यवस्था को स्थापित करने तथा उसके लिए जरुरी अनुमोदन प्राप्त करने की प्रक्रिया में हैं।Ó संयुक्त उपक्रम तैयार होने के बाद पीएसएलवी के एसेंबलिंग से लेकर उपग्रहों के प्रक्षेपण तक की जिम्मेदारी उसे दे दी जाएगी। इसरो ने कहा है कि निजी क्षेत्र द्वारा पूर्ण रूप से तैयार पहले पीएसएलवी से उपग्रहों का प्रक्षेपण 2020 में हो सकता है।


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