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अंग्रेजी में बात करने पर छात्राओं को बस से उतारा

2017-04-21 00:34:11


अंग्रेजी में बात करने पर छात्राओं को बस से उतारा
बेंगलूरु. बेंगलूरु मेट्रोपोलिटन परिवहन निगम (बीएमटीसी) की बस में तीन छात्राओं का आपस में अंग्रेजी में बात करना परिचालक को इतना नागवार गुजरा कि उसने तीनों को रास्ते में उतार दिया।

उत्तर भारत की तीनों छात्राओं ने सोशल मीडिया पर घटना के बारे में लिखने के साथ ही पुलिस आयुक्तप्रवीण सूद से शिकायत कर परिचालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। छात्राओं ने पुलिस आयुक्त को बताया कि वे तीनों सहेलियां शहर के अलग-अलग कॉलेजों में पढ़ती हैं। कई दिन बाद तीनों मिली थीं इसलिए 15 अप्रेल को एक साथ बन्नेरघट्टा नेशनल पार्क घूमने गईं। वहां से वे कोरमंगला जाने वाली बस में सवार हुईं और दैनिक पास खरीदा।

यात्रा के दौरान तीनों आपस में अंग्रेजी में बातें कर रही थीं। तभी परिचालक उनके पास आया और उन्हें चुप रहने को कहा। एक छात्रा ने कारण पूछा तो परिचालक बोला कि वह बस में यात्री को कन्नड़ के अलावा अन्य किसी भी भाषा में बात नहीं करने देता। इस पर एक छात्रा ने परिचालक से कहा कि भारतीय संविधान के तहत सभी को इच्छानुसार भाषा में बात करने का अधिकार है और यह अधिकार उनसे कोई छीन नहीं सकता। इस बात से खफा परिचालक ने तीनों से टिकट दिखाने को कहा। तीनों ने अपने-अपने दैनिक पास परिचालक को दिखाए। जब बस डेयरी सर्कल पहुंची तो परिचालक ने उन्हें जबरन वहां उतार दिया। छात्राएं ऑटो लेकर कोरमंगला पहुंचीं।

पुलिस आयुक्त ने पुलिस उपायुक्त (मध्यक्षेत्र) चंद्रगुप्त को मामले की जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस आयुक्त ने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि रिपोर्ट मिलने के बाद परिचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बीएमटीसी के चेयरमैन नागराज यादव ने बताया कि मामले की जांच जारी है। परिचालक ने तीनों छात्राओं के साथ दुव्र्यहार किया है। परिचालक किस डिपो का है, इसका पता लगाकर उसे नोटिस जारी किया जाएगा। उसके खिलाफ हर हाल में कार्रवाई होगी ताकि भविष्य में कोई और ऐसी गलती न करे। ऐसे लोगों के कारण बेंगलूरु का नाम बदनाम होता है।

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